कांग्रेस की बढ़ी टेंशन : राज्यसभा की एक सीट पर घमासान, दावेदारों की दौड़ ने बढ़ाई बेचैनी, दिल्ली से भोपाल तक तेज हुई सियासी हलचल

भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की चिंता बढ़ती जा रही है। पार्टी के सामने अपनी एकमात्र राज्यसभा सीट बचाने की चुनौती है, वहीं टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या ने अंदरूनी हलचल भी तेज कर दी है। दिल्ली से लेकर भोपाल तक बैठकों, चर्चाओं और लॉबिंग का दौर शुरू हो चुका है। कांग्रेस नेतृत्व इस सीट को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर प्रदेश की राजनीति और संगठनात्मक ताकत पर पड़ सकता है।
सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। इस दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति, संगठन की गतिविधियों और राज्यसभा चुनाव के संभावित समीकरणों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार सिंघार ने प्रदेश संगठन से जुड़ी फीडबैक रिपोर्ट भी नेतृत्व को सौंपी। मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि कांग्रेस राज्यसभा उम्मीदवार चयन में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
दिग्विजय सिंह के संकेतों से बदले समीकरण
राज्यसभा चुनाव को लेकर सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दोबारा राज्यसभा जाने की इच्छा नहीं जताई। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से किसी नए चेहरे को अवसर देने का सुझाव दिया है। साथ ही अनुसूचित जाति वर्ग से उम्मीदवार बनाए जाने की वकालत भी की है। उनके इस रुख के बाद कई वरिष्ठ नेताओं, युवा चेहरों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों की दावेदारी सक्रिय हो गई है। इससे टिकट की दौड़ और रोचक बन गई है।
एक सीट बचाने की चुनौती, क्रॉस वोटिंग का डर
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर दो सीटें भाजपा के खाते में जाती दिखाई दे रही हैं, जबकि कांग्रेस के हिस्से में एक सीट आने की संभावना है। हालांकि पार्टी को क्रॉस वोटिंग की आशंका परेशान कर रही है। यदि भाजपा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो सकता है। इसी वजह से कांग्रेस नेतृत्व अपने विधायकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
लॉबिंग के बीच उम्मीदवार चयन पर मंथन
दिल्ली में कांग्रेस नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। कई संभावित दावेदार संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में हैं। पार्टी ऐसा चेहरा तलाश रही है जो क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साध सके। राज्यसभा की यह सीट कांग्रेस के लिए सिर्फ संसदीय प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं, बल्कि प्रदेश में पार्टी की एकजुटता और राजनीतिक प्रभाव का भी महत्वपूर्ण पैमाना मानी जा रही है। ऐसे में उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस की टेंशन फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही।
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