संसद का मानसून सत्र : सरकार के महत्वाकांक्षी बिलों पर फिर अड़ंगा लगाएगी कांग्रेस, हाईलेवल मीटिंग के बाद जयराम ने भरी हुंकार

नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार के विधायी एजेंडे के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का संकेत दिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को सदन में लाने की तैयारी कर रही है, उनका वह पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी, ताकि संसद के भीतर और बाहर प्रभावी ढंग से विरोध दर्ज कराया जा सके।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि पार्टी की बैठक में सरकार के प्रस्तावित विधेयकों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विपक्ष की एकजुटता बनाए रखते हुए इन विधेयकों का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
परिसीमन विधेयक पर सरकार को घेरने की तैयारी
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एक बार फिर परिसीमन विधेयक को संसद में लाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले सरकार इस विधेयक पर आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। कांग्रेस का मानना है कि यह विधेयक कई गंभीर सवाल खड़े करता है, इसलिए पार्टी पहले की तरह इस बार भी इसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों को साथ लाने का प्रयास किया जाएगा।
संविधान संशोधन और चुनाव सुधार के प्रस्ताव भी निशाने पर
कांग्रेस ने न्यायाधीशों को हटाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर भी आपत्ति जताई है। इस विधेयक की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति का विपक्ष पहले ही बहिष्कार कर चुका है। पार्टी का कहना है कि वह संसद में भी इस प्रस्ताव का विरोध करेगी।
इसके अलावा, एक देश-एक चुनाव के प्रस्ताव को लेकर भी कांग्रेस का रुख पहले जैसा ही है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यदि इस संबंध में आगे कोई कदम बढ़ाया जाता है तो उसका भी विरोध किया जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि यह व्यवस्था देश की संघीय संरचना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर डाल सकती है।
शिक्षा, विदेशी चंदा और खाद्य सुरक्षा कानून पर भी विरोध
जयराम रमेश ने कहा कि यदि सरकार श्विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयकश् लेकर आती है तो कांग्रेस उसका भी विरोध करेगी। इसी तरह विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में बदलाव के प्रयासों का भी पार्टी विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून करोड़ों गरीब परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के मौजूदा विधायी एजेंडे में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, जिसका समर्थन किया जा सके। इसलिए पार्टी संसद के भीतर और बाहर सभी मुद्दों पर मजबूती से अपनी आवाज उठाएगी।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
