नेपाल की ‘ना’ ने बढ़ाई तबाही की चिंता : विदेशी मदद ठुकराकर खुद संभाल रहा मोर्चा 500 से ज्यादा मौतें और 1000 से अधिक लोग लापता, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। तीन दिन के भीतर दो बार आई आपदा ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत और 1000 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन तबाही का दायरा बढ़ता जा रहा है।
चीन-अमेरिका की मदद को नेपाल ने किया इनकार
हालात बेहद गंभीर होने के बावजूद नेपाल सरकार ने चीन, अमेरिका समेत कई देशों की ओर से दी गई हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षित खोज-बचाव दलों की मदद स्वीकार नहीं की है। सरकार का कहना है कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं। नेपाल के इस फैसले के पीछे वर्ष 2015 के भूकंप का कड़वा अनुभव बड़ी वजह माना जा रहा है।
2015 की अफरातफरी से लिया सबक
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 2015 के भूकंप के बाद बड़ी संख्या में विदेशी राहत दल, सैन्य विमान और अंतरराष्ट्रीय संगठन काठमांडू पहुंचे थे। इससे एयरपोर्ट और प्रशासनिक व्यवस्था पर जबरदस्त दबाव पड़ा था। विदेशी टीमों के बीच तालमेल की कमी और संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा ने स्थिति को और जटिल कर दिया था। इसी अनुभव के चलते नेपाल इस बार राहत अभियान की कमान अपने सुरक्षा बलों के हाथ में रखना चाहता है।
भारत ने संभाला मोर्चा, भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
विदेशी बचाव दलों से दूरी बनाने के बावजूद नेपाल ने भारत से रेस्क्यू और राहत सहायता मांगी है। भारत अब एक टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी में है। पहले टोही दल भेजकर जमीनी हालात और जरूरी उपकरणों का आकलन किया जा रहा है। साथ ही मेडिकल टीम भी भेजी जा रही है। भारत ने वायुसेना के सी-130जे और सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों के जरिए 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई है।
इसमें टेंट, कंबल, दवाएं, सोलर लैंप और खाद्य पैकेट शामिल हैं। भारत ने क्षतिग्रस्त पुलों के स्थान पर वैली और प्रीफैब्रिकेटेड पुल उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल की ओर से मांगी जा रही सहायता के अनुरूप भारत तत्काल कदम उठा रहा है।
मदद के लिए ‘एकल द्वार प्रणाली’
नेपाल ने विदेशी सहायता को व्यवस्थित करने के लिए ‘एकल द्वार प्रणाली’ लागू की है। सभी देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय मदद प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से देने की अपील की गई है, ताकि राहत सामग्री और संसाधनों का समान वितरण हो सके।
700 पर्यटक लापता, 300 भारतीय भी शामिल
बाढ़ के बाद 34 देशों के करीब 700 पर्यटकों से संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें कैलाश मानसरोवर और गोसाईंकुंड यात्रा पर गए करीब 300 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। विदेशी नागरिकों की तलाश और सहायता के लिए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने विशेष आपातकालीन टीम गठित की है। रसुवा के तिमुरे में अधिकारी तैनात किए गए हैं, जो सुरक्षा बलों से लगातार जमीनी जानकारी लेकर काठमांडू स्थित समन्वय केंद्र तक पहुंचा रहे हैं।
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