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मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच भस्म आरती : जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजा श्रीमहाकाल लोक, बाबा के दिव्य दर्शन कर निहाल हुए भक्त

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 29, 2026
05:19 AM
जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजा श्रीमहाकाल लोक, बाबा के दिव्य दर्शन कर निहाल हुए भक्त

उज्जैन। भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा के पावन अवसर पर शनिवार को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। बाबा महाकाल के इस दिव्य दर्शन का लाभ लेने के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ नजर आई और पूरा वातावरण हर-हर महादेव तथा जय श्री महाकाल के जयघोष से भक्तिमय बना रहा।

शनिवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने की परंपरा पूरी करने के बाद ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन का क्रम शुरू हुआ। भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से बाबा का अभिषेक किया गया।

भांग से हुआ बाबा का विशेष श्रृंगार

पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर बाबा महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को दिव्य मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती की शुरुआत हुई। भांग से बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें उनका अलौकिक और मनोहारी स्वरूप भक्तों के सामने प्रकट हुआ।

महाकाल मंदिर के पुजारी द्वारा विधि-विधान से महाआरती संपन्न कराई गई। जैसे ही भक्तों को बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए, मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा। घंटियों और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर दिखाई दिए।

रात से कतार में लगे रहे श्रद्धालु

बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध थे। भस्म आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक वेशभूषा का विशेष महत्व है। पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य रहता है।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा से जुड़ी है भस्म आरती

धार्मिक परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी अद्भुत धार्मिक परंपरा और बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन की अभिलाषा में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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