नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भीषण तबाही : मरने वालों का आंकड़ा 600 के पार, 2000 से अधिक लापता, त्रिशूल नदी और बढ़ाई परेशानी, बढ़ा विदेशी मदद का दायरा

काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। प्राकृतिक आपदा में अब तक 616 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 2 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में बाढ़ का पानी उतरने के बावजूद खतरा पूरी तरह टला नहीं है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में मलबे के नीचे दबे लोगों और लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।
बाढ़ ने मचाई तबाही, कई इलाके बने मलबे का ढेर
भीषण बारिश के बाद रसुवा और मध्य नेपाल के कई हिस्सों में अचानक आई बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। तेज बहाव अपने साथ घर, वाहन, सड़कें और पुल तक बहाकर ले गया। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट जाने से राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं। जलविद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
त्रिशुली नदी में पानी का स्तर बढ़ने के कारण आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती, हेलीकॉप्टर उड़ान भी प्रभावित
राहत और बचाव अभियान के बीच खराब मौसम सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई क्षेत्रों में अभियान अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। हेलीकॉप्टरों की उड़ान प्रभावित होने से दुर्गम इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
बचाव दल मौसम में थोड़े सुधार के दौरान उपलब्ध समय का पूरा इस्तेमाल करते हुए मलबे और प्रभावित इलाकों में जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। साथ ही बंद सड़कों को दोबारा खोलने का काम भी जारी है।
भारत ने भेजी विशेषज्ञों की टीम
नेपाल में राहत और बचाव अभियान को मजबूती देने के लिए भारत ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। भारतीय दल में चिकित्सा कर्मियों के साथ सुरंग बचाव के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम नेपाल सरकार के अनुरोध पर प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर अभियान में सहयोग कर रही है। नेपाल सरकार ने भी माना है कि बेहद जटिल और दुर्गम स्थानों पर विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय सहायता ली जा सकती है।
विदेशी मदद का दायरा बढ़ा, स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नजर
आपदा के बाद नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। विशेष रूप से सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों की तलाश तथा शवों की पहचान के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी नेपाल में स्वास्थ्य संबंधी आपात जरूरतों को देखते हुए सहायता बढ़ाई है। संगठन ने तत्काल 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की है। इसके साथ ही आपात स्वास्थ्य सामग्री, तंबू, मास्क, दस्ताने और हाथों को संक्रमण से बचाने वाली सामग्री भी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई गई है।
भूस्खलन का खतरा बरकरार, दहशत में लोग
तिब्बत क्षेत्र में भूस्खलन के मलबे से बनी झील में जलस्तर बढ़ने की खबरों ने भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे दोबारा भूस्खलन या मिट्टी खिसकने का खतरा पैदा हो सकता है। नेपाल में इस समय सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और दुर्गम इलाकों को फिर से मुख्य मार्गों से जोड़ना है। तबाही के बीच बचाव दल हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि मलबे और बाढ़ की चपेट में आए लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
