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कानून मानने से इनकार तो संविधान निष्ठा पर सवाल : वंदे मातरम पर रक्षा मंत्री का कांग्रेस का तीखा हमला, दो टूक दी चेतावनी भी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 21, 2026
09:49 AM
वंदे मातरम पर रक्षा मंत्री का कांग्रेस का तीखा हमला, दो टूक दी चेतावनी भी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। दोनों ही दल एक-दूसरे पर तीखा वार-पलटवार कर रहे हैं। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के रुख पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस के रुख को संविधान और राष्ट्रभावना और देश के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। इतना ही नहीं रक्षा मंत्री ने यह भी चेतावनी दी है कि गीत के सम्मान से पीछे हटना केवल राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

‘कानून मानने से इनकार तो संविधान निष्ठा पर सवाल’

राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि संविधान के तहत संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है। संसद से पारित कानून देश के प्रत्येक नागरिक के लिए बाध्यकारी होते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति या संगठन कानून का पालन करने से इनकार करता है तो उसकी संविधान के प्रति निष्ठा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान देश की एकता और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा विषय है। राष्ट्रीय गीत के सम्मान से इनकार करने वाले रुख पर भी उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए।

1937 के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पर निशाना

कांग्रेस ने 1937 के अपने प्रस्ताव का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को ही गाने के फैसले का समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे प्रमुख नेताओं की सहमति से यह निर्णय लिया गया था।

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की इस दलील पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि 1937 का प्रस्ताव मुस्लिम लीग की कट्टरपंथी मांगों के दबाव में लिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों का खामियाजा देश को आगे चलकर विभाजन के रूप में भुगतना पड़ा।

‘इतिहास की गलती दोहराना देश के लिए खतरा’

रक्षा मंत्री ने कहा कि कट्टरपंथी तत्वों के दबाव के सामने झुकना हमेशा देश के लिए नुकसानदेह रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी उसी तरह का समझौता करने की दिशा में बढ़ रही है। उनके मुताबिक, ऐसी राजनीति देश के भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के फैसले को असंवैधानिक और निंदनीय बताते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ का विरोध करके पार्टी ने अपने राजनीतिक इरादे देश के सामने जाहिर कर दिए हैं।

संसद में पारित कानून से बढ़ा विवाद

इस विवाद की पृष्ठभूमि में संसद के हालिया मानसून सत्र में पारित राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी महत्वपूर्ण है। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह वैधानिक संरक्षण देना है।

विधेयक के पारित होने के दौरान विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया और वॉकआउट किया था। अब राजनाथ सिंह के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा जहां इसे राष्ट्र सम्मान और संवैधानिक व्यवस्था से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस अपने पुराने प्रस्ताव और परंपरा का हवाला दे रही है। ऐसे में ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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