पश्चिम बंगाल चुनाव : मतगणना की रफ्तार पर इसी पर बिफरी दीदी, काउंटिंग एजेंट्स से की अपील

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसने राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि मतगणना की प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मतगणना की रफ्तार पर सवाल
ममता बनर्जी ने दावा किया कि जमीनी स्तर से उन्हें जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार अब तक केवल लगभग 13% वोटों की ही गिनती पूरी हो पाई है। उन्होंने आशंका जताई कि यह धीमी गति सामान्य नहीं है और इसके पीछे कोई सुनियोजित रणनीति हो सकती है। उनका कहना है कि कुछ जगहों पर गिनती को बीच में रोकने की भी खबरें सामने आई हैं, जो चिंता का विषय है।
काउंटिंग एजेंट्स को सतर्क रहने की अपील
मुख्यमंत्री ने अपने पार्टी के काउंटिंग एजेंट्स और कार्यकर्ताओं से खास अपील की है कि वे अपनी-अपनी जगहों पर डटे रहें और किसी भी परिस्थिति में मतगणना केंद्र न छोड़ें। उन्होंने कहा कि यह समय सतर्कता और धैर्य का है, क्योंकि हर वोट लोकतंत्र की आवाज़ है और उसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है।
बिजली कटौती और CCTV बंद होने के आरोप
मतगणना शुरू होने से पहले ही ममता बनर्जी ने कई इलाकों से चिंताजनक रिपोर्ट मिलने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि हुगली के श्रीरामपुर, नदिया के कृष्णानगर, बर्दवान के औसग्राम और कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र जैसे स्थानों पर जानबूझकर बिजली काटी जा रही है। इसके साथ ही CCTV कैमरों के बंद होने और स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की भी बात कही गई है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुरक्षा पर जोर
ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे पूरी रात जागकर निगरानी रखें, ठीक वैसे ही जैसे वह खुद हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत उसे घेरकर शिकायत दर्ज कराएं और CCTV फुटेज की मांग करें।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
उन्होंने इन सभी घटनाओं के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक चुनाव आयोग या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने मतगणना की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे स्थिति किस दिशा में जाती है और चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है।
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