रविवार, 9 अगस्त 202608:14:40 AM
Download App
Home/देश

सावन का पहला सोमवार : महाकालेश्वर से लेकर ओंकारेश्वर उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों भक्तों ने किया बाबा महाकाल का अलौकिक दर्शन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 03, 2026
07:19 AM
महाकालेश्वर से लेकर ओंकारेश्वर उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों भक्तों ने किया बाबा महाकाल का अलौकिक दर्शन

उज्जैन। सावन माह के पहले सोमवार पर शिवालयों में भक्ति, श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। आधी रात से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के करीब ढाई बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर जय महाकाल के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा।

इधर, खंडवा जिले की धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर पूरी तरह शिवमय हो गई। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल चतुर्थ ज्योतिर्लिंग श्री ओंकारेश्वर और श्री ममलेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर, नर्मदा घाट और प्रमुख मार्गों पर हर-हर महादेव, बोल बम और ओम नमः शिवाय के जयघोष लगातार गूंजते रहे। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों शिवभक्त और कांवड़िए भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

चलित भस्म आरती से श्रद्धालुओं को मिली बड़ी राहत

सावन के पहले सोमवार पर महाकाल मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का हरिओम जल, दूध, दही, घी, शक्कर और ताजे फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद भांग, सूखे मेवों, केसर और सुगंधित इत्र से बाबा का मनमोहक श्रृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित होने के बाद विशेष महाआरती संपन्न हुई, जिसके दिव्य दर्शन कर हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने अग्रिम बुकिंग से वंचित श्रद्धालुओं के लिए विशेष चलित भस्म आरती दर्शन की व्यवस्था की। इस पहल से बड़ी संख्या में भक्त बिना किसी परेशानी के बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सके। प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और मार्गदर्शन की भी व्यवस्था की।

पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान

जिला प्रशासन के अनुसार रविवार को 4 लाख 19 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकाल के दर्शन किए थे, जबकि सावन के पहले सोमवार पर यह संख्या पांच लाख के पार पहुंचने का अनुमान है। जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने स्वयं मंदिर पहुंचकर भस्म आरती और श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बाबा महाकाल की पारंपरिक शाही सवारी को देखते हुए भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं और श्रद्धालुओं से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।

ओंकारेश्वर मंदिर में भक्तों का रेला

इसी तरह ओंकारेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का रेला देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने नर्मदा जल से भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और देश की खुशहाली की कामना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार दर्शन और जलाभिषेक का क्रम देर रात तक जारी रहने की संभावना है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की अलग पहचान

ओंकारेश्वर की विशेष धार्मिक मान्यता इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग पहचान देती है। यहां नर्मदा नदी के उत्तर तट पर भगवान ओंकारेश्वर और दक्षिण तट पर भगवान ममलेश्वर विराजमान हैं। मान्यता है कि दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से एक पूर्ण ज्योतिर्लिंग दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि सावन माह में यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र दोपहर में निकलने वाली भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की पारंपरिक शाही सवारी रहेगी। दोनों मंदिरों से भगवान के चल-विग्रह नर्मदा तट पर लाए जाएंगे, जहां पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन के बाद नौका विहार कराया जाएगा। इसके बाद शाही सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकलेगी। जगह-जगह श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करेंगे और पूरा नगर शिवभक्ति में सराबोर दिखाई देगा।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें