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कानून सभी के लिए बराबर, : सुप्रीम कोर्ट की महुआ मोइत्रा को दो टूक, वर्चुअली पूछताछ की मांग भी ठुकराई, जानें क्या है मामला

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 07, 2026
10:45 AM
सुप्रीम कोर्ट की महुआ मोइत्रा को दो टूक, वर्चुअली पूछताछ की मांग भी ठुकराई, जानें क्या है मामला

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। पुलिस पूछताछ से राहत पाने के लिए वर्चुअल पेशी की उनकी मांग को शीर्ष अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने दो टूक कहा कि कानून सभी के लिए बराबर है और सांसद होने के आधार पर किसी को विशेष सुविधा नहीं मिल सकती। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कर दिया कि राजनीति में आने वालों को विरोध और जांच दोनों का सामना करना पड़ता है। अदालत का रुख कड़ा होता देख महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज मानते हुए निस्तारित कर दिया।

राजनीति में आए हैं तो विरोध का सामना भी करना होगा

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करना चाहती हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि पिछली बार पुलिस थाने पहुंचने पर उनके खिलाफ प्रदर्शन हुआ था और उन पर अंडे भी फेंके गए थे।

इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, क्या सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं? उन्होंने आगे कहा कि जब किसी ने राजनीति में आने का फैसला किया है तो विरोध या ऐसी घटनाओं से डरना नहीं चाहिए। अदालत ने स्वतंत्रता सेनानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने देश के लिए गोलियां तक झेली थीं।

हेट स्पीच मामले में भी नहीं मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को कथित हेट स्पीच मामले में भी राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।

महुआ मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में मामला दर्ज है। उन्होंने एफआईआर रद्द करने और पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने केवल गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए जांच में सहयोग को अनिवार्य शर्त बनाया था।

अब हाईकोर्ट में होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा। महुआ मोइत्रा को तय तारीख पर जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होकर सहयोग करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्तूबर को कलकत्ता हाईकोर्ट में होगी, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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