भाजपा छोड़ते ही शहजाद को याद मिडिल क्लास, : पूर्व प्रवक्ता ने सरकारों पर दागे तीखे सवाल, कहा- मध्यवर्गीय परिवार बन चुका है एटीएम

नई दिल्ली। भाजपा के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद तेज तर्राट प्रवक्ता शहजाद पूनावाला मध्यम वर्गीय परिवार की याद आ गई है। इतना ही उन्होंने मध्यमवर्गीय परिवारों को लेकर केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों तक से तीखे सवाल भी किए हैं। पूनावाला ने सरकारों सवाल किया है कि मिडिल क्लास एटीएम बन गया है, आखिर कब तक मिडिल क्लास टैक्स का बोझ उठाता रहेगा और बदले में उसे जरूरी सुविधाओं के लिए अपनी जेब से दोबारा भुगतान करना पड़ेगा? बता दें कि शहजाद पूनावाला ने सोमवार को भाजपा से इस्तीफा दिया है। इसके कुछ घंटों बाद ही उनके सुर बदल गए हैं।
पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तीखे अंदाज में कहा कि भारत का मिडिल क्लास अब सरकारों के लिए ‘एटीएम’ बन चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टैक्स वसूली में कोई समझौता नहीं होता, तो सुविधाओं और जवाबदेही के मामले में समझौता क्यों? पार्टी से इस्तीफे के बाद उनका यह बयान सियासी बहस को भी गरमा सकता है।
स्कूल और अस्पताल पर भी उठाए सवाल
पूनावाला ने देश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मध्यमवर्गीय परिवारों को बच्चों की पढ़ाई के लिए निजी स्कूल और माता-पिता के इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में सवाल यह है कि नागरिकों से वसूले जाने वाले टैक्स का लाभ उन्हें किस रूप में मिल रहा है।
उन्होंने सरकारों से जवाब मांगते हुए कहा कि अगर नागरिक आयकर, जीएसटी, टोल, सेस, ईंधन कर और स्थानीय कर चुका रहा है तो बदले में उसे बेहतर सरकारी स्कूल, अच्छी सड़कें, साफ हवा और पीने का साफ पानी क्यों नहीं मिलना चाहिए?
‘एक-एक रुपये की जवाबदेही हो’
पूर्व बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें देश के विकास में योगदान देने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन सरकारों को यह बताना होगा कि जनता से वसूले गए पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे हो रहा है। उन्होंने कहा कि टैक्स वसूलने वाली हर अथॉरिटी को एक-एक रुपये की जवाबदेही देनी चाहिए। पूनावाला ने सिंगापुर जैसी व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत का मिडिल क्लास कम टैक्स के साथ बेहतर सड़क, सार्वजनिक परिवहन और नागरिक सुविधाएं क्यों नहीं पा सकता।
नौकरीपेशा लोगों को टैक्स में राहत की मांग
पूनावाला ने खास तौर पर वेतनभोगी करदाताओं के लिए व्यक्तिगत आयकर में राहत की मांग की। उनका कहना है कि जब तक नागरिकों को विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक नौकरीपेशा मिडिल क्लास पर व्यक्तिगत आयकर का बोझ कम किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी राशि टैक्स के रूप में देने के बाद मध्यमवर्गीय परिवार को बदले में क्या मिल रहा है?
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
