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MP की कृषि विरासत को वैश्विक पहचान, : चार विशिष्ट फसलों को मिला जीआई टैग, बढ़ेगी किसानों की आमदनी, महाकौशल की कुटकी और धान को मिला सम्मान,

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Jun 28, 2026
02:27 PM
चार विशिष्ट फसलों को मिला जीआई टैग,  बढ़ेगी किसानों की आमदनी, महाकौशल की कुटकी और धान को मिला सम्मान,

भोपाल। मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। कृषि कल्याण वर्ष के अंतर्गत राज्य की चार विशिष्ट कृषि उपजों—सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर और छत्रिय धान—को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) मिल गया है। इस उपलब्धि से महाकौशल क्षेत्र के किसानों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। अब इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान और मजबूत ब्रांड वैल्यू प्राप्त होगी।

राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। सरकार जैविक, प्राकृतिक और पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के साथ कृषि उत्पादों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दे रही है।

वैज्ञानिक प्रयासों से मिली बड़ी सफलता, कानूनी संरक्षण और बेहतर बाजार

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के तकनीकी सहयोग से यह उपलब्धि संभव हो सकी है। जीआई टैग मिलने से इन फसलों को कानूनी संरक्षण मिलेगा और उनकी बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। इससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और कृषि निर्यात को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।

पूर्व में सीहोर के शरबती गेहूं और रीवा के सुंदरजा आम को भी जीआई टैग मिल चुका है। अब इन चार नई फसलों के जुड़ने से प्रदेश की कृषि पहचान और मजबूत हुई है। कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अन्य विशिष्ट उपजों को भी जीआई टैग दिलाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा।

महाकौशल क्षेत्र के आदिवासी किसानों को सबसे अधिक लाभ

इन चारों फसलों का संबंध मुख्य रूप से महाकौशल और आदिवासी बहुल क्षेत्रों से है, जिससे डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, उमरिया और बालाघाट जैसे जिलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इन उत्पादों की मांग बढ़ने से स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि होगी और पारंपरिक खेती को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक ने कहा कि ऐसे प्रयास किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ कृषि आधारित उद्योगों और निर्यात को भी गति देंगे।

सिताही कुटकी और नागदमन कुटकी बनीं किसानों की ताकत

सिताही कुटकी मात्र 60 दिन में तैयार होने वाली छोटी बाजरा (लिटिल मिलेट) की देशी किस्म है, जो सूखा, कम उपजाऊ मिट्टी और कीटों के प्रति अत्यधिक सहनशील है। यह पहाड़ी और कठिन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त फसल है और डिंडोरी के हजारों आदिवासी किसानों के लिए आजीविका का मजबूत साधन बनी हुई है।

डिंडोरी में इसकी खेती हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है, जिससे हजारों किसानों की आजीविका और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। वहीं नागदमन कुटकी अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। यह स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और आय दोनों का महत्वपूर्ण स्रोत बन रही है।

बैगानी अरहर और छत्रिय धान को भी मिली नई पहचान

बैगानी अरहर एक विशेष किस्म की दाल है, जिसमें उच्च प्रोटीन और रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है। यह प्रति हेक्टेयर 15 से 20 क्विंटल तक उत्पादन देने में सक्षम है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। छत्रिय धान भी अपनी विशिष्टता के कारण अब जीआई टैग के साथ बाजार में बेहतर पहचान बनाएगा।

कृषि विकास की नई दिशा

जीआई टैग मिलने से मध्यप्रदेश की पारंपरिक कृषि विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि कृषि आधारित प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात को भी नई गति मिलेगी। सरकार और संबंधित संस्थाएं आगे भी राज्य की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों को जीआई टैग दिलाने की दिशा में कार्य जारी रखेंगी।

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