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इस मुद्दे को न लें भावनात्मक रूप से : सीजेपी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सीजेआई ने तत्काल हस्तक्षेप से किया इनकार

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May 25, 2026
08:34 AM
सीजेपी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सीजेआई ने तत्काल हस्तक्षेप से किया इनकार

नई दिल्ली। काकरोच जनता पार्टी से जुड़े मामले पर सोमवार को सुनवाई हुई। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को सलाह देते हुए कहा कि इस मुद्दे को “इतने भावनात्मक तरीके से” न लिया जाए।

अदालत में यह भी कहा गया कि फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार की अत्यावश्यकता नहीं दिखती, इसलिए उचित समय पर ही इसकी सुनवाई या जांच पर विचार किया जाएगा। याचिका में यह मांग भी की गई थी कि अदालत में होने वाली बहसों का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए तथा कथित फर्जी वकालत डिग्रियों के मामलों की सीबीआई जांच कराई जाए।

बता दें कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी और अदालत में कथित टिप्पणियों एवं ऑनलाइन अभियान से जुड़े पहलुओं पर गंभीर चिंता जताई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा है कि जब समय उचित होगा, तब सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। अदालत के इस रुख को फिलहाल संयमित और प्रक्रियात्मक माना जा रहा है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर उठे सवाल

मामले की पृष्ठभूमि में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अभियान भी चर्चा में है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह अभियान न्यायिक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से फैला और बाद में इससे जुड़े कुछ खातों और ऑनलाइन गतिविधियों पर कार्रवाई भी की गई।

सूत्रों और याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया है कि इस डिजिटल समूह के खिलाफ विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाए गए, जिसके बाद इसके संचालकों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। वहीं दूसरी ओर, इस अभियान को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यह व्यंग्य और ऑनलाइन एक्टिविज्म का हिस्सा था, जिसने बाद में व्यापक बहस को जन्म दिया।

सीबीआई जांच की मांग और अदालत का रुख

एक अन्य जनहित याचिका में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़ी गतिविधियों और उनके सोशल मीडिया प्रसार की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस पूरे घटनाक्रम में डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और संभावित संगठित गतिविधियों की जांच जरूरी है।

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