पहलगाम आतंकी हमला : NIA की चार्जशीट में साजिश की खौफनाक पटकथा, धर्म पूछकर बरसाईं गोलियां, सज्जाद जट्ट था हमले का मास्टरमाइंड

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले की उस खौफनाक साजिश का पर्दाफाश कर दिया है, जिसने पूरे देश को दहला दिया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि आतंकियों ने बैसरन पार्क में घूमने आए निर्दोष पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया। हमले को तीन आतंकियों फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी ने अंजाम दिया था, जबकि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड सज्जाद जट्ट उर्फ अली भाई बताया गया है।
हमले के बाद शुरू हुई बड़ी जांच
हमले के तुरंत बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल को कब्जे में लेकर सबूत जुटाने शुरू किए। मौके से कारतूसों के खोखे, हथियारों से जुड़े सुराग और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य बरामद किए गए। शुरुआती जांच में ही साफ हो गया था कि हमला पूरी प्लानिंग के तहत किया गया। सात दिन बाद केस जम्मू-कश्मीर पुलिस से लेकर एनआईए को सौंप दिया गया। एजेंसी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, स्केच मैप और घटनास्थल की हर जानकारी दोबारा खंगाली। जांच टीम बैसरन पार्क पहुंची, जहां बारिश और कीचड़ के बीच टायर, घोड़ों और पैरों के निशानों की जांच की गई।
सुनसान जगह को बनाया निशाना
एनआईए जांच में सामने आया कि बैसरन पार्क ऐसा इलाका था, जहां से पूरे मैदान पर नजर रखी जा सकती थी। वहां न सीसीटीवी कैमरे थे और न ही कोई सीधी सड़क। आतंकियों ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया। 30 अप्रैल को बड़े स्तर पर ग्रिड सर्च ऑपरेशन चलाया गया। एनआईए, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और सुरक्षा बलों ने पूरे जंगल की तलाशी ली। बाद में सीबीआई ने इलाके की 3डी मैपिंग की, जिससे आतंकियों की मूवमेंट और हमले के एंगल को समझने में मदद मिली।
गवाह के बयान से खुला राज
जांच के दौरान 1,113 स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई। एक अहम गवाह ने बताया कि हमले से एक दिन पहले उसने बशीर अहमद जोठाड़ को तीन हथियारबंद लोगों के साथ देखा था। गवाह के अनुसार, बशीर उन आतंकियों को परवेज के ढोक यानी झोपड़ी में लेकर गया था। गवाह ने यह भी बताया कि आतंकियों ने उससे कलमा पढ़ने को कहा था। कलमा पढ़ने के बाद ही उसे छोड़ा गया। इससे जांच एजेंसियों को यकीन हुआ कि आतंकियों ने धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाया।
ढोक में छिपे रहे आतंकी
जांच में सामने आया कि आतंकियों ने परवेज अहमद के ढोक में खाना खाया और रात बिताई। परवेज और उसकी पत्नी ताहिरा ने बताया कि आतंकी अमरनाथ यात्रा और सुरक्षा बलों की गतिविधियों के बारे में पूछताछ कर रहे थे। उनकी भाषा में पंजाबी लहजा भी साफ था। बाद में बशीर और परवेज को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आतंकियों ने अपने बैग और हथियार ढोक में छिपाए थे और मदद के बदले 3000 रुपये भी दिए थे।
धर्म पूछकर मारी गोलियां
चार्जशीट के मुताबिक, आतंकियों ने हमले से पहले पार्क की रेकी की और फिर अलग-अलग पोजिशन लेकर फायरिंग शुरू की। दोपहर 2: 23 बजे सुलेमान ने M-4 कार्बाइन से पहली गोली चलाई, जिसके बाद बाकी आतंकियों ने ।ज्ञ-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
गवाहों के मुताबिक, आतंकी लोगों से उनका धर्म पूछ रहे थे। कई लोगों से कलमा पढ़ने को कहा गया। जो लोग कलमा नहीं पढ़ पाए या जिन्होंने खुद को मुसलमान नहीं बताया, उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी गई। हमलावर बार-बार कहते रहे कृ “मोदी को बोलो।”
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह हमला सिर्फ हत्या नहीं बल्कि डर फैलाने और सांप्रदायिक संदेश देने की सोची-समझी आतंकी साजिश थी।
admin
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
