लापरवाही पर गिरेगी गाजः : समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सीएम की दो टूक, महिला-बाल विकास योजनाओं में बर्दाश्त नहीं ढिलाई

भोपाल। महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए और मैदानी स्तर पर जवाबदेही बढ़ाई जाए। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, मुख्य सचिव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक पात्र हितग्राही इनका लाभ प्राप्त कर सकें।
पोषण सुधार के लिए विभागों के बीच समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री ने बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागों के साथ निजी अस्पतालों और सामाजिक संस्थाओं को भी जोड़ने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य राज्यों और प्रदेश के विभिन्न जिलों में सफल साबित हुए नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश में लागू करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
कामकाजी महिलाओं के लिए बनेंगे नए हॉस्टल
बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं की सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन औद्योगिक इकाइयों में महिला कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहां पीपीपी मॉडल के तहत वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित किए जाएं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में ऐसे हॉस्टलों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए बढ़ाए जा रहे कदम
प्रताड़ित महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद, इंदौर, धार और पीथमपुर सहित कई स्थानों पर नए वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत किए गए हैं। वहीं चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से 51 जिला स्तरीय और एक राज्य स्तरीय केंद्र द्वारा अब तक 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान और निगरानी के लिए 13 जिलों में विशेष मैपिंग अभियान भी चलाया जा रहा है।
आंगनवाड़ी और मातृ वंदना योजना में प्रदेश की बड़ी उपलब्धि
बैठक में बताया गया कि 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 9.28 लाख बच्चों को ‘विद्यारंभ’ कार्यक्रम के तहत प्रमाण-पत्र प्रदान कर विद्यालयों में सहज प्रवेश सुनिश्चित किया गया। इसके अलावा 12,670 मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों को मुख्य आंगनवाड़ी केंद्रों में उन्नत कर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 15.51 लाख गर्भवती महिलाओं को 798 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई है। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश पिछले ढाई वर्षों से देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। साथ ही सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बीमा योजना का लाभ भी उपलब्ध कराया गया है।
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