भोजशाला में बनेगा सरस्वती लोक : मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला, 48 लाख लोगों को मिलेगी मुफ्त रजिस्ट्री, इन प्रस्तावों पर भी लगी मुहर

भोपाल। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में धार्मिक विरासत के संरक्षण, ग्रामीण संपत्ति अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए गए। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन फैसलों का सीधा लाभ प्रदेश के करोड़ों नागरिकों को मिलेगा।
कैबिनेट ने धार स्थित भोजशाला परिसर में ‘सरस्वती लोक’ विकसित करने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इससे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को नया स्वरूप मिलेगा तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और विपणन को बढ़ाने के लिए ‘गोरस एप’ शुरू करने की मंजूरी भी दी गई।
जल संरक्षण अभियान पर 6,500 करोड़ खर्च
मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में दो लाख से अधिक जल संरचनाओं पर कार्य किया गया है। इस अभियान के लिए करीब 6,500 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।
स्वामित्व योजना के तहत मिलेगा मुफ्त रजिस्टर्ड दस्तावेज
कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला स्वामित्व योजना को लेकर रहा। ग्रामीण आबादी क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के पास संपत्ति के अधिकृत दस्तावेज नहीं थे, जिससे उन्हें बैंक ऋण लेने में परेशानी होती थी। प्रदेश में 48 लाख 32 हजार स्वामित्व प्रमाण पत्र तैयार किए जा चुके हैं और 19 लाख से अधिक शासकीय संपत्तियों की पहचान भी की गई है।
अब सरकार सभी लाभार्थियों को पंजीकृत संपत्ति दस्तावेज उपलब्ध कराएगी। रजिस्ट्री शुल्क और अन्य खर्च राज्य सरकार वहन करेगी, जिससे नागरिकों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। इस योजना पर लगभग 3,800 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। सरकार का दावा है कि ऐसा कदम उठाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा।
मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों को बड़ी राहत
राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों की तीन प्रमुख योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही संबद्ध अस्पतालों के विकास और संचालन के लिए 14 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अब छात्रों को सिलवाकर नहीं, तैयार मिलेगी स्कूल ड्रेस
सरकार ने सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को ड्रेस वितरण की व्यवस्था में बदलाव किया है। अभी तक विद्यार्थियों को दो यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये डीबीटी के माध्यम से दिए जाते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में कपड़ा और सिलाई की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
नई व्यवस्था के तहत सरकार तैयार स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराएगी। इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे और प्रदेश के वस्त्र उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण यूनिफॉर्म मिल सकेगी।
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