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ट्विशा शर्मा केस में बड़ा अपडेट : CBI ने रिमांड न बढ़ाकर दोनों आरोपियों को भेजा न्यायिक हिरासत में, सास और पति से पूछताछ के बाद कार्रवाई

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Jun 02, 2026
10:01 AM
CBI ने रिमांड न बढ़ाकर दोनों आरोपियों को भेजा न्यायिक हिरासत में, सास और पति से पूछताछ के बाद कार्रवाई

भोपाल। राजधानी भोपाल के ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में नया अपडेट सामने आया है। है। विशेष अदातल ने आरोपी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत पर भेजा है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र समर्थ सिंह की रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग नहीं की। इसके बाद दोनों आरोपियों को भोपाल की सीजेएम अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

सीबीआइ ने मंगलवार दोपहर पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को विशेष अदालत में पेश किया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर लगे मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि ट्विशा शर्माके साथ उनके संबंध सामान्य और सौहार्दपूर्ण थे, तथा लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। वहीं सीबीआई अब उनके बयानों की तुलना घटनास्थल से मिले तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों से कर रही है, ताकि वास्तविक परिस्थितियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

गिरबाला सिंह कर रहीं खुद की पैरवी

गिरिबाला सिंह कोर्ट में खुद की पैरवी कर रही हैं। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज के जारी करने के आरोप पर कहा कि यह बिल्कुल गलत है। हम ने कोई सीसीटीवी फुटेज जारी नहीं किए। गिरिबाला ने कोर्ट में कहा कि मीडिया ट्रायल बंद हो। हम जहां जा रहे है मीडिया वहां आ रही है। यह बंद किया जाए। हमारी जान को खतरा है। सीन रिक्रिएशन के दौरान तीन घर पहले उतारने और मीडिया को फुटेज देने पर गिरबाला ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सीधे मेरे घर पर भी गाड़ी लगाई जा सकती थी। इधर सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि हम अभी ज्यूडीशियल कस्टडी की मांग कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर हम पुलिस रिमांड पर लेंगे।

अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी जांच की तैयारी

सूत्रों के अनुसार सीबीआई अब मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। संभावना है कि उन्हें जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा। इसके अलावा, मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साक्ष्यों के संरक्षण में जो कथित चूक हुई, वह लापरवाही का परिणाम थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण शामिल था।

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