बामुलाहिजा : सत्ता के अंदरखाने, तबादलों का दर्द, पेपरलीक की दस्तक!

- संदीप भम्मरकर
ट्रांसफर के बाद जारी है रुलाई
विधायक रो रहे हैं... सांसद रो रहे हैं... मंत्री तो अपना दुखड़ा भी सुना नहीं पा रहे हैं। लेकिन तबादला सीजन में हकीकत कुछ ऐसी ही है। सभी ने नोटशीट लिखी... ताल्लुकदार मंत्री को खुद सौंप दी... अपने लहजे में गुजारिश भी कर दी... लेकिन ट्रांसफर फिर भी न हुआ। बीते साल गुस्साए माहौल के बाद उम्मीद थी कि मंत्रियों ने इस बार कोई जुगत बैठा ली होगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। राजस्व और महिला बाल विकास विभाग में सबसे ज्यादा रोना है। स्कूली शिक्षा विभाग में तो अभी लिस्ट निकलना बाकी है, लेकिन यहां भी हालात ऐसे ही नजर आ रहे हैं। एक विभाग के मंत्री जो उपमुख्यमंत्री भी हैं, लेकिन अफसरों के दखल से अपने चहीते अफसर का तबादला भी मनचाहे जिले में नहीं करा सके। बाकियों की क्या कहिएगा।
कागजों पर हिट, मैदान में चित
तबादलों की समय सीमा का फॉर्मूला कागजों पर यानी सरकारी आदेशों में तो हिट साबित हुआ है। 16 जून वाली मियाद तो वक्त पर पूरी हो गई है, लेकिन ये लिस्ट केवल प्रदेश स्तरीय ही है, यानी विभागाध्यक्ष स्तर वाली लिस्ट ही है। जिलों में तबादलों का दौर अभी भी अटका हुआ है। यानी साफ है, तय वक्त पर तबादले करने की समय सीमा का पालन नहीं हो पाया है। मैदान में यह फॉर्मूला पूरी तरह धराशायी साबित हो रहा है। हकीकत यह है कि जमीन स्तर पर काम करने वाली टीम तो अब तक रिलीविंग और जॉइनिंग ऑर्डर का इंतज़ार कर रही है।
एमपी पहुंच रही पेपरलीक की लपटें
ये खबर ब्रेकिंग है। पेपरलीक से जुड़ी होने के कारण जल्द ही सुर्खियों में भी आने वाली है। दरअसल, नीट पेपरलीक के बाद देश भर में हुई कार्यवाहियों की लपटें अब एमपी में भी पहुंच रही है। महाराष्ट्र में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पेपर लीक की जांच कर रही टीम ने जो आरोपी पकड़ा है, उसने एमपी पीएससी समेत कई दूसरी परीक्षाओं के पेपरलीक कांड को भी उगल दिया है। महाराष्ट्र पुलिस की एसआईटी अब जल्द ही एमपी में कदम रखने वाली है। खबरें आ रही हैं कि आरोपी बिजेंद्र गुप्ता ने एमपी समेत दूसरे राज्यों में पेपरलीक कांड को स्वीकार किया है। यदि 2023 में हुए एमपीपीएससी के पेपर में लीक कांड उजागर हुआ तो एमपी में बवाल कटना तय है।
जोश बढ़ा, गुटबाज़ी भी जागी!
माहौल बनाना आसान है, उसे संभालना सबसे मुश्किल। कांग्रेस ने ज़मीन पर माहौल तो बना दिया है और कार्यकर्ताओं में जोश भी साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन इसी जोश के साथ गुटबाज़ी की आवाज़ें भी तेज़ होने लगी हैं। जिलों से शिकायतें पहुंच रही हैं कि पूछपरख कुछ चेहरों तक सीमित है, जिससे पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। खबर है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने यह चिंता सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दी है। अब सबकी निगाहें पीएसी की बैठक पर हैं। गलियारों में चर्चा है, अगर वहां गुटबाज़ी सबसे बड़ा मुद्दा बनी, तो समझिए पार्टी इलाज भी शुरू करने वाली है!
खेत में नेता, चुनाव की बुवाई!
बारिश आई नहीं कि खेतों के साथ राजनीति की बुवाई भी शुरू हो गई! चुनाव में अभी दो साल बाकी हैं, लेकिन किसान प्रेम की फसल अभी से लहलहाने लगी है। Mohan Yadav ने बैतूल में हल चलाया, Shivraj Singh Chouhan ने पायजामा चढ़ाकर बुवाई की, तो Jitu Patwari भी खेत में उतर गए। तस्वीरें सुर्खियां बनीं, तो गलियारों में मुस्कुराहट के साथ चर्चा छिड़ गई, फसल की बुवाई खेत में हो रही है… और वोटों की बुवाई कैमरों के सामने।
जिम्मेदारी मिली, तालमेल गुम!
पद बांटना आसान है, जिम्मेदारी बंटवाना सबसे मुश्किल। कांग्रेस में नई जिम्मेदारियों के ऐलान के बाद भी कई नेता अब तक अपने-अपने रोल का इंतजार कर रहे हैं। विंध्य की एक पूर्व विधायक ने पारिवारिक कारणों से जिम्मेदारी कुछ समय के लिए टाल दी थी, लेकिन अब शादी निपटने के बाद सक्रिय होकर नई जिम्मेदारी पाने की कोशिश में हैं। दूसरी ओर कई वरिष्ठ नेता इस बात से नाराज बताए जा रहे हैं कि संभाग और जिले का प्रभार तय करते समय उनसे राय तक नहीं ली गई। नतीजा, समन्वय की गाड़ी जगह-जगह अटकती दिख रही है। गलियारों में चर्चा है, पद तो बंट गए… लेकिन तालमेल की फाइल अभी भी लंबित है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
