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ग्रामीण भारत पर मस्क की नजर, : गांव-गांव पहुंचेगा इंटरनेट, सबसे कमजोर कनेक्टिविटी वाले इलाकों में मददगार होगी स्टारलिंक

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 21, 2026
06:19 AM
गांव-गांव पहुंचेगा इंटरनेट, सबसे कमजोर कनेक्टिविटी वाले इलाकों में मददगार होगी स्टारलिंक

नई दिल्ली। भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है, लेकिन गांवों और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट की पहुंच अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी बीच स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की संभावनाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा देश के उन क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है, जहां अभी इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की सुविधाएं सीमित हैं।

मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि स्टारलिंक भारत के सबसे कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद कर सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियों का इंतजार कर रही है।

11 हजार से ज्यादा गांव अब भी 4जी से दूर

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 तक देश के 11,256 सूचीबद्ध गांवों में 4जी मोबाइल सेवा उपलब्ध नहीं थी। यह आंकड़ा बताता है कि देश के कई दूरदराज इलाकों तक पारंपरिक दूरसंचार ढांचा अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क पहुंचाना भौगोलिक परिस्थितियों और लागत के कारण मुश्किल होता है। यही वजह है कि उपग्रह आधारित इंटरनेट को इन इलाकों के लिए एक संभावित विकल्प माना जा रहा है।

गांव और शहर के इंटरनेट में बड़ा अंतर

मार्च 2026 तक भारत में कुल 109.3 करोड़ इंटरनेट सब्सक्रिप्शन दर्ज किए गए। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों से 44.08 करोड़ सब्सक्रिप्शन शामिल थे। हालांकि इंटरनेट घनत्व के आंकड़े तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखते हैं। ग्रामीण भारत में प्रति 100 लोगों पर इंटरनेट सब्सक्रिप्शन घनत्व 48.31 था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 126.80 तक पहुंच गया। यानी इंटरनेट की उपलब्धता के मामले में गांव अभी भी शहरों से काफी पीछे हैं।

पहाड़ों से लेकर द्वीपों तक काम आ सकती है स्टारलिंक

स्टारलिंक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए हर जगह जमीन पर फाइबर नेटवर्क या मोबाइल टावर की जरूरत नहीं होती। निम्न-पृथ्वी कक्षा में मौजूद उपग्रहों के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराने वाली यह तकनीक दुर्गम गांवों, पहाड़ी इलाकों, द्वीपों और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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