'जनता ने वेल में आने के लिए नहीं चुना'... : संसद में विपक्ष पर बरसे जगदंबिका पाल, हंगामे से छह बार ठप हुई लोकसभा, राम मंदिर और NEET मुद्दे पर गरमाया मानसून सत्र

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को जोरदार राजनीतिक टकराव के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी, नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
जगदंबिका पाल ने विपक्ष को लगाई कड़ी फटकार
हंगामे के बीच उस समय माहौल और गर्म हो गया जब पीठासीन अधिकारी के रूप में सदन की कार्यवाही चला रहे डिप्टी स्पीकर पैनल के सदस्य जगदंबिका पाल ने विपक्षी सांसदों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने विशेष रूप से डीएमके सांसद टी.आर. बालू का नाम लेते हुए कहा कि वह वरिष्ठ सांसद हैं और उन्हें नए सांसदों के सामने अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
जगदंबिका पाल ने कहा, "जनता ने आपको सदन के वेल में आने के लिए नहीं चुना है। आपको अपनी सीट से जनता की समस्याएं उठानी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश की नजर संसद की कार्यवाही पर है और सांसदों का व्यवहार लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।
'सदन ऐसे कैसे चलेगा?'
पीठासीन अधिकारी ने नियम 377 का उल्लेख करते हुए कहा कि सांसदों को संसदीय प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे वेल में आकर हंगामा करने के बजाय अपनी सीटों पर लौटें और नियमों के अनुसार चर्चा में भाग लें। उन्होंने सवाल किया कि अगर लगातार व्यवधान होता रहेगा तो सदन की कार्यवाही कैसे चलेगी और जनता के मुद्दों पर चर्चा कैसे होगी।
सरकार की अपील भी बेअसर रही
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने और चर्चा के माध्यम से मुद्दे उठाने की अपील की। हालांकि विपक्ष ने अपनी मांगों पर अड़े रहते हुए नारेबाजी जारी रखी। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही एक-दो नहीं, बल्कि छह बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः इसे दोपहर बाद तीन बजे तक के लिए टालना पड़ा।
सत्र में टकराव के आसार
मानसून सत्र के पहले ही दिन जिस तरह सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में भी संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ मैदान में उतर चुका है। ऐसे में पूरे मानसून सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है।
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