मंगलवार, 21 जुलाई 202601:26:26 PM
Download App
Home/धर्म

भगवान शिव के प्रिय महीने की शुरुआत 30 जुलाई से : भोले की भक्ति के लिए समर्पित रहेंगे 31 दिन, जानें सावन सोमवार की तिथियां और धार्मिक महत्व के बारे में

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 21, 2026
07:08 AM
भोले की भक्ति के लिए समर्पित रहेंगे 31 दिन, जानें सावन सोमवार की तिथियां और धार्मिक महत्व के बारे में

भगवान शिव के सबसे प्रिय महीने सावन की शुरुआत 30 जुलाई से होने जा रही है। जो 31 अगस्त तक चलेगा। यानि यह महीना पूरा 31 दिनों का रहेगा। भोलेनाथ की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले सावन में श्रद्धापूर्व उपासना करने से भगवान शिव भक्तों पर शीर्घ प्रसन्न हो जाते हैं और सभी मनाकामनाएं भी पूरी करते हैं।

भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले सावन महीने का इंतजार अब समाप्त होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार से होगी। मान्यता है कि सावन में श्रद्धापूर्वक शिव उपासना करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस वर्ष सावन का समापन 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि के साथ होगा और पूरा महीना 31 दिनों तक चलेगा।

Sawan Month Start date 2021 know Sawan Somwar vrat date list puja vidhi  importance | Sawan Somwar 2021: कब से लगेगा सावन मास? जानें कितने हैं सावन  सोमवार और क्यों है पूजा

उदया तिथि के अनुसार 30 जुलाई से माने जाएंगे सावन के दिन

वैदिक पंचांग के मुताबिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात 8रू05 बजे से प्रारंभ होकर 30 जुलाई की रात 9:30 बजे तक रहेगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए सावन मास का आरंभ 30 जुलाई से माना जाएगा। इसी दिन से शिव मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

जानिए कब पड़ेंगे चार सावन सोमवार

सावन में सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व होता है क्योंकि यह दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस वर्ष सावन में कुल चार सोमवार व्रत पड़ेंगे। पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चैथा 24 अगस्त को होगा। इन दिनों शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त व्रत रखकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

सावन के दौरान श्रद्धालु प्रातः स्नान कर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करते हैं। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और भस्म अर्पित की जाती है। कई भक्त रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करवाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में किए गए अभिषेक और मंत्र जाप से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

Sawan Somwar 2023: सावन के तीसरे सोमवार को बन रहा है विशेष संयोग, इस विधि  से करें शिव की पूजा

शिव-पार्वती के मिलन का भी प्रतीक है सावन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें स्वीकार किया। इसलिए इस महीने शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और सौभाग्य की प्राप्ति होने की मान्यता है।

शिव पुराण में बताया गया है सावन का महत्व

शिव पुराण में सावन मास को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। इसमें उल्लेख मिलता है कि इस महीने भगवान शिव का ध्यान, मंत्र जाप, दान-पुण्य और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्तों का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई आराधना पर भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें