धनतेरस के साथ दीपोत्सव का भव्य आगाज : जानें मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और धन्वंतरि की पूजा विधि और धन खरीदी का शुभ मुहूर्त

आज शुक्रवार से देशभर में दीपोत्सव पर्व की शुरआत हो गई है। देशभर में धनतेरस का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बाजारों में सुबह से ही खुरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी है। मान्यता के अनुसार इस दिन सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और अन्य नई वस्तुएं खरीदना शुभ होता है। वहीं, शाम को मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। अगर आप भी धनतेरस पर पूजा और खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए शुभ मुहूर्त, राहुकाल, पूजा सामग्री और पूजन की पूरी जानकारी।
6 नवंबर को ही क्यों मनाया जा रहा धनतेरस?
हिंदू पंचांग के अनुसार धनतेरस हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू हो गई है, जो 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि होने के कारण धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जा रहा है।
धनतेरस 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
दिल्ली के पंचांग के अनुसार, शाम को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा करना शुभ माना गया है।
पूजा का शुभ मुहूर्तः शाम 6ः02 से रात 7ः57 बजे तक।
पूजा की कुल अवधिः 1 घंटा 56 मिनट।
प्रदोष कालः शाम 5ः33 से रात 8ः09 बजे तक।
वृषभ कालः शाम 6ः02 से रात 7ः57 बजे तक।
ध्यान दें कि पूजा के समय में अलग-अलग शहरों के अनुसार अंतर हो सकता है।
सोना-चांदी खरीदने के शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर खरीदारी को लेकर लोगों में खास उत्साह रहता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुभ, लाभ और अमृत चैघड़िया में खरीदारी करना अच्छा माना जाता है।
लाभ चौघड़िया : सुबह 7ः54 से 9ः16 बजे।
अमृत चौघड़िया : सुबह 9ः16 से 10ः39 बजे।
शुभ चैघड़ियाः दोपहर 12ः01 से 1ः24 बजे।
चर चौघड़िया : शाम 4ः09 से 5ः31 बजे।
लाभ चौघड़िया : रात 8ः46 से 10ः24 बजे।
राहुकाल: सुबह 10ः39 से दोपहर 12ः01 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।
धनतेरस पूजा के लिए जरूरी सामग्री
पूजा से पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्र कर लें। इसमें शामिल हैंरू
भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा।
भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की तस्वीर।
रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल-माला।
धूप, अगरबत्ती और कपूर।
घी और मिट्टी के दीपक।
फल, मिठाई और पंचामृत।
गंगाजल, कलश और पूजा का जल।
पान, सुपारी और लौंग।
नई खरीदी गई वस्तुएं या सोने-चांदी के सिक्के।
कैसे करें धनतेरस पर पूजा?
शाम को पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमाएं स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। मां लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। अंत में आरती करें और घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
मान्यता है कि धनतेरस पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और आरोग्य का आशीर्वाद बना रहता है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
