मप्र की राजनीति में सादगी बनाम खर्च की बहस तेज, : जीतू ने सीएम मोन को लिखी चिट्ठी, सरकारी उत्सवों पर एक साल की रोक और वित्तीय अनुशासन की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी खर्चों और राजनीतिक आयोजनों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य में वित्तीय अनुशासन लागू करने और बड़े सरकारी उत्सवों व भव्य आयोजनों पर कम से कम एक वर्ष की रोक लगाने की मांग की है। इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है।
पटवारी ने अपने पत्र में केंद्र सरकार की अपीलों का हवाला देते हुए कहा कि जब आम जनता से मितव्ययिता और बचत की अपेक्षा की जा रही है, तो सरकार को भी अपने स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाली जैसी गंभीर चुनौतियों के बीच करोड़ों रुपये के सरकारी आयोजन जनता के दर्द को और बढ़ाते हैं।
जनता की गाढ़ी कमाई का जिम्मेदारी से हो उपयोग
उन्होंने लिखा कि सरकारी कार्यक्रम अब जनसेवा की बजाय राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हैं, जहां बड़े मंच, भव्य स्वागत द्वार, होर्डिंग्स, हेलीकॉप्टर और प्रचार तंत्र पर भारी खर्च किया जा रहा है। पटवारी के अनुसार यह धन जनता की गाढ़ी कमाई से आता है, इसलिए इसका उपयोग अधिक जिम्मेदारी से होना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने यह भी की मांग
कांग्रेस नेता ने यह भी मांग की कि विधायकों और मंत्रियों के वेतन, भत्तों और पेंशन प्रणाली की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि जब सरकार जनता से त्याग की अपेक्षा कर रही है, तो जनप्रतिनिधियों को भी उसी स्तर पर उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कम से कम एक वर्ष के लिए वेतन और सुविधाओं में कटौती पर विचार किया जाए।
पत्र में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का भी उठाया मुद्दा
पत्र में सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया गया है। पटवारी ने आरोप लगाया कि कई बार प्रशासनिक तंत्र का उपयोग जनहित कार्यों की बजाय भीड़ जुटाने और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में किया जाता है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना है कि जब शिक्षा और न्याय जैसे क्षेत्र ऑनलाइन और वर्चुअल हो सकते हैं, तो सरकारी प्रचार और बड़े आयोजनों पर होने वाले खर्च को भी सीमित किया जा सकता है। उन्होंने विदेशी दौरों और बड़े डेलिगेशन पर भी रोक लगाने की मांग की है।
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