बाबा महाकाल की भक्ति में लीन हुए कैलाश खेर : भस्म आरती में शामिल होकर किए भगवान के दिव्य दर्शन, नंदी की पूजा कर मांगा आशीर्वाद

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्री महाकाल लोक का निर्माण होने के बाद वीआईपी लगातार बाबा महाकाल का दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक कैलाश खेर ने बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई और श्रद्धा-भक्ति के साथ दर्शन किए। उन्होंने भोर में होने वाले दिव्य भस्मारती में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद लिया और देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
नंदी हॉल में बैठकर किए भस्म आरती के दर्शन
जानकारी के अनुसार कैलाश खेर सुबह करीब तीन बजे मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का दर्शन किया। आरती के दौरान वे पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए। मंदिर परिसर में गूंज रहे मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण के बीच उन्होंने करीब दो घंटे तक आरती में सहभागिता की। इस दौरान उनके चेहरे पर गहरी आस्था और आध्यात्मिक शांति दिखाई दी।
नंदी महाराज का पूजन-अभिषेक कर मांगा आशीर्वाद
भस्म आरती के पश्चात कैलाश खेर ने नंदी महाराज का विधि-विधान से पूजन-अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार उन्होंने नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी उन्हें बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर पूजा-अर्चना करते देखा। उनके आगमन से मंदिर परिसर में उत्साह का माहौल बना रहा।
मंदिर समिति ने किया सम्मान
दर्शन के उपरांत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने कैलाश खेर का सम्मान किया। समिति की ओर से उन्हें सम्मान स्वरूप दुपट्टा ओढ़ाकर बाबा महाकाल का स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर मंदिर के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनका स्वागत-सत्कार किया।
व्यवस्थाओं की सराहना, बोले-यह महाकाल की कृपा
मीडिया से चर्चा करते हुए कैलाश खेर ने उज्जैन की धार्मिक महिमा का उल्लेख किया और मंदिर की प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों को सुगमता और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराना आसान कार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी अद्भुत व्यवस्था, सकारात्मक ऊर्जा और भक्तों के प्रति समर्पण केवल राजाधिराज बाबा महाकाल के दरबार में ही देखने को मिलता है।
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