बदल रही है चंबल की पहचान : आशी तोमर ने बढ़ाया भिंड का मान, UPSC पास कर बनीं GST विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर

डाकुओं की धरती से निकली नई पहचान, चंबल की बेटी बनी अफसर
प्रदीप राजावत की रिपोर्ट
भिंड। कभी बागियों और डाकुओं की पहचान से चर्चित रहे चंबल अंचल से एक बेटी ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। भिंड जिले की होनहार बेटी आशी तोमर ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर का प्रतिष्ठित पद हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
16 महीने की कठिन ट्रेनिंग के बाद मिली पहली पोस्टिंग
परिजनों के अनुसार, UPSC में सफलता हासिल करने के बाद आशी ने राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर एवं जीएसटी अकादमी में 16 माह का विशेष प्रशिक्षण पूरा किया। इस दौरान उन्हें कर कानून, वित्तीय ऑडिट, जांच प्रक्रिया, प्रशासनिक प्रबंधन और राजस्व प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों का गहन प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उनकी नियुक्ति वाराणसी जीएसटी जोन में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर की गई है। यहां वे जीएसटी अनुपालन, कर संग्रहण और राजस्व प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाएंगी।
बदल रही है चंबल की पहचान
एक समय था जब चंबल का नाम सुनते ही लोगों के मन में डाकुओं और बागियों की छवि उभरती थी। लेकिन आज यही धरती प्रतिभाओं की नई मिसाल बन रही है। चंबल की बेटियां शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं।
आशी तोमर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि अब चंबल की पहचान केवल उसके इतिहास से नहीं, बल्कि यहां की बेटियों की उपलब्धियों से होगी। आज इस क्षेत्र के युवा प्रशासनिक सेवाओं, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
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माता-पिता का संघर्ष रंग लाया
आशी के पिता अनु तोमर, जो पेशे से एक दुकानदार हैं, अपनी बेटी की सफलता पर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा,
"जब लोग कहते थे कि बेटियों को ज्यादा पढ़ाने की जरूरत नहीं है, तब हमने अपनी बेटी के सपनों पर विश्वास किया। आज वही बेटी हमारे परिवार ही नहीं, पूरे भिंड और चंबल क्षेत्र का गौरव बन गई है।"
वहीं उनकी मां ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "आशी ने दिन-रात मेहनत करके यह मुकाम हासिल किया है। हमारा सपना था कि हमारी बेटी देश की सेवा करे और आज वह सपना साकार हो गया है।"
बेटियों को दिया सफलता का मंत्र
वाराणसी रवाना होने से पहले आशी तोमर ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुओं को देते हुए कहा,"मेरी उपलब्धि के पीछे मेरे माता-पिता और शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने हर परिस्थिति में मेरा हौसला बढ़ाया। मैं चंबल की सभी बेटियों से कहना चाहती हूं कि संसाधनों की कमी को कभी अपनी कमजोरी मत बनाइए। बड़े सपने देखिए और उन्हें पूरा करने के लिए उससे भी बड़ी मेहनत कीजिए। सफलता जरूर मिलेगी।"
आशी की इस उपलब्धि से भिंड शहर और पूरे चंबल अंचल में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
आशी तोमर की सफलता आज हजारों युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखती हैं।
नीरज द्विवेदी
5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।
