पापा, मैं डॉक्टर बनूंगी : और फिर हमेशा के लिए खामोश हो गई आकांक्षा,राहुल गांधी ने परिजनों से की बात

रीवा। मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले की नईगढ़ी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम मगनिया की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश को भी झकझोर कर रख दिया है। एक मेधावी छात्रा, जिसने डॉक्टर बनने का सपना देखा था, आज उसी सपने के टूटने की पीड़ा के साथ इस दुनिया को अलविदा कह गई।
घटना के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आकांक्षा के परिजनों से फोन पर बातचीत कर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि यदि वह किसी भी प्रकार की सहायता कर सकते हैं तो अवश्य बताएँ। इस दौरान आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “आप तो देश की सेवा कर रहे हैं, लेकिन मेरी बेटी अब लौटकर नहीं आएगी। वही हमारा इकलौता सहारा थी। उसने अच्छे अंक प्राप्त किए थे और डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उसका मानना था कि यदि पेपर लीक न हुआ होता तो वह डॉक्टर बन जाती और परिवार का कर्ज भी उतार देती।”
बचपन से था डॉक्टर बनने का सपना
परिजनों के अनुसार आकांक्षा बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी की कठिन मेहनत और संघर्ष को देखकर उसने अपनी पढ़ाई को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया था। नीट परीक्षा की तैयारी के लिए उसने दिन-रात एक कर दिए थे। परीक्षा देकर लौटने के बाद उसने अपने पिता को गले लगाकर कहा था, “पापा, आपकी बेटी डॉक्टर बनेगी। मेरा पेपर बहुत अच्छा गया है।”
लेकिन इसके कुछ समय बाद जब नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक की खबरें सामने आईं, तो वह मानसिक रूप से टूटने लगी। परिवार का कहना है कि उसे लगने लगा था कि उसकी वर्षों की मेहनत और प्रतिभा के साथ अन्याय हुआ है। इसी निराशा और मानसिक दबाव के बीच उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
पिता का संघर्ष, बेटी का सपना
आकांक्षा एक साधारण किसान परिवार से थी। उसके पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी बेटी की शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे। बेहतर भविष्य की उम्मीद में परिवार नागपुर चला गया, जहाँ उन्होंने भोजन बनाने का कार्य शुरू किया।
बताया जाता है कि हृदय रोग और बाईपास सर्जरी के बावजूद कृष्ण कुमार प्रतिदिन लगभग 18 घंटे तक मेहनत करते थे, ताकि बेटी का डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो सके। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
सुसाइड नोट ने खोले दर्द के राज
आकांक्षा ने 20 मई को नागपुर में आत्महत्या कर ली थी। उस समय कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था। परिवार भी उसकी आत्महत्या के कारणों को समझ नहीं पा रहा था।
बाद में जब परिजन उसकी किताबें और अध्ययन सामग्री देख रहे थे, तब एक पुस्तक में उसका हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला। एक जून को यह नोट नागपुर के अंबाझरी थाने में पुलिस को सौंपा गया।
पुलिस के अनुसार सुसाइड नोट से संकेत मिलता है कि आकांक्षा दोबारा नीट परीक्षा देने की संभावना को लेकर तनाव में थी। उसे आशंका थी कि पुनः परीक्षा होने पर वह पहले जैसी सफलता हासिल नहीं कर पाएगी।
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यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, प्रतिभा की हत्या है
अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी ने परिजनों से मुलाकात कर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह केवल आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और कथित पेपर लीक माफिया द्वारा एक प्रतिभाशाली छात्रा के सपनों की हत्या है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र की वर्षों की मेहनत को कुछ लोगों के लालच और भ्रष्टाचार के कारण नष्ट कर दिया जाता है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कठोर दंड मिलना चाहिए। उन्होंने मामले की न्यायिक लड़ाई लड़ने और दोषियों को सख्त सजा दिलाने का संकल्प भी व्यक्त किया।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
जनपद पंचायत नईगढ़ी की अध्यक्ष ममता कुंज बिहारी तिवारी ने भी घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आकांक्षा जैसी प्रतिभाशाली बेटियां देश की अमूल्य धरोहर होती हैं। उनकी असमय मृत्यु केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की क्षति है।
उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों की पहचान और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर देश की परीक्षा व्यवस्था, छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और युवाओं के सपनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद सच सामने आता है या नहीं, और क्या इस बेटी को न्याय मिल पाएगा।
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नीरज द्विवेदी
5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।
