मप्र में साइबर ठगी का नया तरीका : कोरियर डिलीवरी और ट्रैकिंग के नाम पर खाता खाली कर रहे ठग, इंदौर पुलिस ने चेताया

इंदौर। मध्यप्रदेश में साइबर ठगों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी का नया तरीका अपना लिया है। अब ठग कोरियर सर्विस की डिलीवरी और पार्सल ट्रैकिंग के नाम पर लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। साइबर अपराधी इतने शातिर है कि खुद को कोरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते हैं और पार्सल की डिलीवरी या ट्रैकिंग के बहाने संदिग्ध हाइपरलिंक भेजते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही खाते खाली हो जाते हैं। लगाार बढ़ रही ऐसी घटनाओं को देखते हुए इंदौर पुलिस अलर्ट हो गई है और आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है।
फर्जी लिंक भेजकर खाते तक पहुंच रहे साइबर अपराधी
इंदौर पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग अनजान नंबरों से कॉल कर लोगों को पार्सल फंसने, डिलीवरी अटकने या ट्रैकिंग अपडेट के नाम पर डराते हैं। इसके बाद उन्हें एक संदिग्ध लिंक भेजकर क्लिक करने या किसी अनजान नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता है। कई बार इसी बहाने व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध हाइपरलिंक पर क्लिक न करें और अनजान नंबरों पर कॉल बैक करने से बचें। पार्सल की स्थिति जानने के लिए संबंधित कोरियर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें।
1.29 लाख की ठगी, क्राइम ब्रांच ने वापस दिलाई रकम
इसी बीच क्राइम ब्रांच इंदौर की फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीम ने साइबर ठगी के एक मामले में त्वरित कार्रवाई कर पीड़ित को राहत दिलाई है। जानकारी के अनुसार, इंदौर निवासी राजकुमार (परिवर्तित नाम) के साथ फेस्टिव सीजन के दौरान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर 1 लाख 29 हजार रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की गई थी।
पीड़ित की शिकायत एनसीआरपी पोर्टल पर प्राप्त होने के बाद क्राइम ब्रांच की साइबर फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीम ने मामले में कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान महाराष्ट्र के संदिग्ध बैंक खातों में ठगी की रकम फ्रीज कराई गई। इसके बाद न्यायालय के आदेश के माध्यम से पूरी राशि पीड़ित को वापस दिलाई गई।
पुलिस की अपील- ओटीपी, पिन और पासवर्ड किसी को न बताएं
इंदौर पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि गूगल पर उपलब्ध अनजान मोबाइल नंबरों पर बिना पुष्टि भरोसा न करें। कोई व्यक्ति खुद को बैंक, सरकारी विभाग या किसी संस्थान का अधिकारी बताता है तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम पिन, बैंकिंग पासवर्ड और निजी जानकारी साझा न करें। बैंकिंग, पेंशन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी के लिए केवल अधिकृत कार्यालयों या आधिकारिक वेबसाइटों का सहारा लें।
पुलिस का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता साइबर ठगी से बचा सकती है। किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक के झांसे में आने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचें।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
