मैं भाजपा-आरएसएस की समर्थक नहीं : कोलकाता दौरे से पहले तसलीमा के निशाने पर वामदल, पूछा तब क्यों थे खामोश

नई दिल्ली। निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने अपने आगामी कोलकाता दौरे को लेकर लगाए जा रहे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह झूठे और राजनीतिक मकसद से प्रेरित हैं। तसलीमा ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल के निमंत्रण पर नहीं, बल्कि सेक्युलर मिशन नामक संस्था के आमंत्रण पर एक साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता जा रही हैं।
सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में तसलीमा ने कहा कि उन्हें न तो भाजपा कोलकाता ले जा रही है और न ही राज्य सरकार ने उन्हें विशेष तौर पर आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक हस्ती की यात्रा के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन की सामान्य जिम्मेदारी होती है और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
वामपंथी नेताओं से पूछा- तब क्यों थे खामोश?
तसलीमा नसरीन ने वामपंथी नेताओं के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पहले कई बार केरल गईं, जहां तत्कालीन वामपंथी सरकार ने उनका स्वागत किया, सम्मानित किया और उन्हें जेड-प्लस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई। उन्होंने पूछा कि उस समय कोलकाता के वामपंथी नेताओं ने कोई विरोध क्यों नहीं किया और अब उनके कोलकाता आने पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है।
वाममोर्चा और तृणमूल दोनों पर लगाए गंभीर आरोप
लेखिका ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सत्ता में रही वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों सरकारों ने कभी उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि पहले वाममोर्चा सरकार ने उन्हें कोलकाता छोड़ने के लिए मजबूर किया और बाद में तृणमूल सरकार ने भी उन्हें राज्य में आने की अनुमति नहीं दी। इतना ही नहीं, उनके धारावाहिक का प्रसारण रोक दिया गया और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके अभिव्यक्ति के अधिकार पर हमला हुआ, तब खुद को प्रगतिशील बताने वाले लोगों ने एक शब्द भी उनके समर्थन में नहीं कहा।
17 साल बाद कोलकाता वापसी
तसलीमा नसरीन वर्ष 2007 के बाद पहली बार एक अगस्त को कोलकाता लौट रही हैं। वह रवींद्र सदन में आयोजित कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में कविता पाठ और नागरिक सम्मान समारोह में भाग लेंगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में उनकी आत्मकथा श्द्विखंडितोश् को लेकर हुए विवाद और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था और उन्हें पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ा था। वर्तमान में तसलीमा नसरीन दिल्ली में लंबे अवधि के रेजिडेंस परमिट पर रह रही हैं।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
