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राजकोट। गुजरात के राजकोट में अवैध अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन हुआ है। राजकोट के नगर निगम के अधिकारियों ने 1,489 अवैध मकानों पर बुलडोजर दौड़ा दिया है। नगर निगम टीपी रोड और नदी किनारे से अतिक्रमण हटा रहा है। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। लगभग 87,000 वर्ग मीटर जमीन को खाली कराने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई भारी भरकत पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। इस दौरान ग्रामीणों में भारी आक्रोश भी देखने को मिला।
सरकार जमीन को खाली करने के लिए पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे। अब अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई जारी है। नगर आयुक्त तुषार सुमेरा ने बताया कि राजकोट शहर के जांगलेश्वर क्षेत्र में नदी के किनारे का निर्माण अवैध अतिक्रमण है और नगर नियोजन सड़क पर हमने अतिक्रमण हटाने का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि राजकोट महानगरपालिका की तरफ से वरिष्ठ अधिकारियों सहित 700 से ज्यादा लोग वहां पर हैं। उन्होंने बताया कि हमारी कोशिश रही है कि जितना हम समझाकर लोगों को वहां से हटा पाए, वो काम भी चालू है।
सड़क पर हुए अतिक्रमण पर भी होगा एक्शन
उन्होंने बताया कि जो अवैध निर्माण नदी के किनारे पर है। 100 प्रतिशत उन पर कार्रवाई की जाएगी। सड़क पर जो अतिक्रमण है, उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। नदी के किनारे और सड़क पर जो अतिक्रमण है, उस पर ही कार्रवाई करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नगरपालिका की टीम पांच दिन से डोर डू डोर कैंपेन कर रही है। एक-एक घर में जाकर समझा रही है। यहां तक कि नगरपालिका की टीम ट्रैक्टर की सुविधा वहां पर दे रही है कि अगर किसी को जगह खाली करनी है तो हमारी सुविधा वहां पर उपलब्ध है।
यह बोले डीसीपी क्राइम
राजकोट के डीसीपी क्राइम जगदीश बगरवा ने बताया कि आज सुबह से जांगलेश्वर क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सुबह से शांतिपूर्ण तरीके से ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि समझाने की वजह से ज्यादातर लोगों ने खुद से डिमोलिश करके अतिक्रमण हटा दिया था। बाकी बचे एरिया पर अतिक्रमण हटाने की शांतिपूर्ण कार्रवाई चल रही है।
क्या बोले लोग?
हालांकि, प्रशासन के इस कदम से वहां दशकों से रह रहे लोगों में काफी गुस्सा है। जंगलेश्वर गली नंबर तीन के रहने वाले हारुनभाई सुमरा ने बताया कि वे 43 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। वे और उनकी बहन दोनों दिव्यांग हैं और मजदूरी करके पेट पालते हैं। उन्होंने कहा, हमें सिर्फ दो दिन पहले बताया गया कि हमारा घर गिरा दिया जाएगा। अब हम कहां जाएंगे? हमें शायद सड़कों पर रहना पड़े। वहीं, एक अन्य निवासी हालिनबेन ने कहा कि उनका परिवार 50 साल से यहां रह रहा है और उन्हें घर खाली करने का आदेश मिला है। उन्होंने कहा, आठ लोगों के परिवार को कोई भी किराए पर घर देने के लिए तैयार नहीं है। हम सड़क पर रहने की तैयारी कर रहे हैं।
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