गेहूं उपार्जन में साइबर ठगी से हड़कंप : नाथ ने सरकार को घेरा, किसान सम्मान निधि से लाखों नाम कटने और भुगतान गड़बड़ी पर उठाए सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। किसानों के खातों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का भुगतान नहीं पहुंचने और राशि संदिग्ध खातों में ट्रांसफर होने के मामलों ने प्रदेश की राजनीति गरमा दी है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने राज्य सरकार पर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए पीड़ित किसानों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की है।
शिवपुरी में किसानों के भुगतान में गड़बड़ी
कमलनाथ ने जारी बयान में कहा कि शिवपुरी जिले में सरकारी गेहूं खरीद के बाद किसानों को जो भुगतान किया जाना था, वह उनके खातों में पहुंचने के बजाय संदिग्ध बैंक खातों में ट्रांसफर हो गया। इससे बड़ी संख्या में किसान साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसान पूरे साल मेहनत कर फसल तैयार करता है, लेकिन जब भुगतान का समय आता है तो साइबर ठग उसकी कमाई हड़प लेते हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन किसानों की राशि गायब हुई है, उन्हें तुरंत पूरा मुआवजा दिया जाए ताकि उन्हें आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
किसान सम्मान निधि पर भी उठे सवाल
कमलनाथ ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में एक वर्ष के भीतर योजना से तीन लाख से अधिक किसानों के नाम हटा दिए गए हैं। उनके अनुसार वर्ष 2024-25 में जहां 86.49 लाख किसान इस योजना का लाभ ले रहे थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 83.01 लाख रह गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना पर्याप्त जानकारी दिए बड़ी संख्या में किसानों को योजना से बाहर कर दिया। इसके अलावा करीब 80 हजार किसानों की ई-केवाईसी लंबित है और लगभग 1.87 लाख किसानों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं होने के कारण उन्हें किस्त का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को किसानों को परेशान करने के बजाय सभी पात्र किसानों के खातों में तुरंत राशि जारी करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में असंतोष बढ़ सकता है।
प्रदेश में गेहूं उपार्जन और किसान सम्मान निधि को लेकर उठे इन सवालों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें सरकार की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
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