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मिशन वात्सल्य को नई ताकत : भोपाल में बाल संरक्षण के लिए शुरू हुआ राष्ट्रीय प्रशिक्षण अभियान, चार चरणों में होगा कार्यक्रम

admin

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Jun 05, 2026
10:36 AM
भोपाल में बाल संरक्षण के लिए शुरू हुआ राष्ट्रीय प्रशिक्षण अभियान, चार चरणों में होगा कार्यक्रम

भोपाल। बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मार्गदर्शन में सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान, नई दिल्ली द्वारा बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्षों और सदस्यों के लिए 13 दिवसीय आवासीय मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में आयोजित हो रहा है।

राष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम को चार अलग-अलग बैचों में आयोजित किया गया है, जिसमें मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 134 प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। प्रथम बैच का प्रशिक्षण 1 जून 2026 से शुरू हो चुका है, जिसमें 36 प्रतिभागी शामिल हैं। इसके बाद दूसरा बैच 29 जून से 11 जुलाई, तीसरा बैच 20 जुलाई से 1 अगस्त तथा चैथा और अंतिम बैच 5 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इन बैचों में क्रमशः 33, 33 और 32 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

विशेषज्ञों की देखरेख में मिल रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन संस्थान की उपसंचालक एवं कोर्स डायरेक्टर श्रीमती नवीदा खातून की निगरानी में किया जा रहा है। अनुभवी विशेषज्ञ और प्रशिक्षक प्रतिभागियों को बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना सक्सेना ने कहा कि इस प्रकार के व्यापक प्रशिक्षण से बाल कल्याण समितियों के पदाधिकारी बच्चों के सर्वोत्तम हित में अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और कानूनसम्मत निर्णय लेने में सक्षम होंगे। उन्होंने इसे बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

मिशन वात्सल्य और बाल अधिकारों पर विशेष फोकस

13 दिवसीय इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मिशन वात्सल्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, बाल अधिकारों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों तथा संरक्षण तंत्र की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा संकटग्रस्त और जोखिमग्रस्त बच्चों की पहचान के लिए वल्नरेबिलिटी मैपिंग, पुनर्वास प्रक्रियाएं और संस्थागत देखभाल जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कई जिलों के प्रतिनिधि हुए शामिल

प्रथम बैच में अनूपपुर, अशोकनगर, बड़वानी, भोपाल, बुरहानपुर, दमोह, दतिया, देवास, डिंडौरी, गुना, हरदा, नर्मदापुरम, इंदौर, खंडवा, मंडला, बालाघाट, रायसेन, सीहोर और विदिशा सहित विभिन्न जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्ष और सदस्य शामिल हुए हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें किशोर न्याय अधिनियम, दत्तक ग्रहण कानून, बाल संरक्षण योजनाओं और बच्चों के अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों में दक्ष बनाया जा रहा है, ताकि प्रदेश में बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनाया जा सके।

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