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पर्यटन में दुनिया का सिरमौर बनने की राह पर भारत : नीति आयोग ने बताए बड़े सुधार के मंत्र, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल

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Jun 30, 2026
03:09 PM
नीति आयोग ने बताए बड़े सुधार के मंत्र, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल

नई दिल्ली। भारत को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने के लिए व्यापार में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस), वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने और संस्थागत सुधारों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। नीति आयोग ने मंगलवार को जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि देश में पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन जटिल नियम, प्रक्रियागत बाधाएं और बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था इस क्षेत्र की वास्तविक क्षमता को सीमित कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार यदि इन चुनौतियों का समाधान किया जाए तो पर्यटन भारतीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और क्षेत्रीय विकास का सबसे मजबूत इंजन बन सकता है।

अर्थव्यवस्था और रोजगार में बड़ा योगदान

रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के पर्यटन क्षेत्र ने देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 15.73 लाख करोड़ रुपये (करीब 170 अरब डॉलर) का योगदान दिया, जो कुल जीडीपी का 5.22 प्रतिशत है। इस क्षेत्र ने लगभग 8.46 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट है कि पर्यटन देश के सबसे महत्वपूर्ण रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल हो चुका है।

घरेलू पर्यटन बना विकास की ताकत

नीति आयोग ने बताया कि भारत में घरेलू पर्यटन लगातार मजबूत हुआ है। वर्ष 2024 में देशभर में 2.9 अरब घरेलू यात्राएं दर्ज की गईं, जो महामारी से पहले वर्ष 2019 के 2.3 अरब के रिकॉर्ड को भी पार कर गईं। रिपोर्ट के अनुसार मजबूत घरेलू पर्यटन ने पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा दी है और यह भविष्य के विकास का प्रमुख आधार बन सकता है।

प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर सबसे बड़ी ताकत

भारत के पास पर्यटन के लिए विश्वस्तरीय संसाधन मौजूद हैं। देश में 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, 106 राष्ट्रीय उद्यान और 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं। इसके अलावा धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वेलनेस पर्यटन की समृद्ध परंपरा भारत को दुनिया के अन्य देशों से अलग पहचान देती है।

विदेशी पर्यटकों की हिस्सेदारी अब भी कम

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में भारत में दो करोड़ से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन हुआ और इससे लगभग 35 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई, जो वर्ष 2023 की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद वैश्विक पर्यटन बाजार में भारत की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत से भी कम है। वहीं वास्तविक विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब एक करोड़ रही, जो महामारी से पहले के स्तर से नीचे है और थाईलैंड, मलेशिया तथा वियतनाम जैसे देशों की तुलना में काफी कम है।

सुधारों से खुलेगी विकास की नई राह

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत से विदेश यात्रा करने वाले लोगों की संख्या और खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि घरेलू पर्यटन की मांग का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों की ओर जा रहा है। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि भारत के पर्यटन क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि अनुकूल कारोबारी माहौल का अभाव है। उन्होंने कहा कि नियमों की जटिलता, बिखरी हुई संस्थागत प्रक्रियाएं और प्रशासनिक अक्षमताएं निवेश तथा विदेशी पर्यटकों के आगमन में बाधा बन रही हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि वीजा व्यवस्था आसान बनाई जाए, व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल किया जाए और पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए तो भारत दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

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