संवाद से विश्वास तक : मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ एनएसए की हाइलेवल मीटिंग, समान अवसर और भरोसे पर जोर

नई दिल्ली। राजधानी में दिल्ली में हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने मुस्लिम समुदाय के 14 प्रमुख बुद्धिजीवियों से एक महत्वपूर्ण बैठक की। नई पीएमओ बिल्डिंग में आयोजित यह मुलाकात करीब डेढ़ घंटे चली और इसे सरकार व अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संवाद की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उद्योगपति और शिक्षाविद जफर सरेशवाला ने किया। उनके साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित लोग शामिल थेकृउद्योग, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक कार्य और पत्रकारिता। बैठक में शामिल प्रमुख नामों में फारुक पटेल, इनामुलहक इराकी, जुनेद शरीफ, जहीर काजी, कौसर जहां, नईमा खातून और पत्रकार समीना शेख जैसे नाम शामिल रहे।
प्रगति और स्थिरता सामूहिक भागीदारी पर निर्भर
बैठक का केंद्रीय संदेश एकता और साझी जिम्मेदारी पर आधारित था। डोभाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत एक कश्ती है, हम सभी या तो साथ यात्रा करेंगे या साथ डूबेंगे।” उनके इस कथन ने यह रेखांकित किया कि देश की प्रगति और स्थिरता सभी समुदायों की सामूहिक भागीदारी पर निर्भर करती है।
प्रतिनिधिमंडल ने उठाए यह मुद्दे
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा, रोजगार और निष्पक्ष अवसर जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरेशवाला ने बताया कि उन्होंने सरकार के सामने ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ की मांग रखी-ऐसा वातावरण जहां न किसी के साथ भेदभाव हो और न ही किसी को विशेष सुविधा दी जाए। इस दृष्टिकोण को संतुलित और समावेशी नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुझाव माना जा रहा है।
बैठकों से दूर होती हैं गलतफहमियांः काजी
अन्य प्रतिभागियों ने भी इस संवाद को सकारात्मक बताया। जहीर काजी ने कहा कि इस तरह की बैठकों से समाज में फैली गलतफहमियां दूर होती हैं और भरोसा मजबूत होता है। वहीं समीना शेख ने सोशल मीडिया पर बढ़ते विवादों और मुसलमानों को लेकर फैल रही नकारात्मक धारणा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डोभाल ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और समाधान सुझाने का प्रयास किया।
वरिष्ठ पत्रकार ने पहल को बताया धुरंधर कदम
वरिष्ठ पत्रकार शीला भट्ट ने इस पहल को “धुरंधर कदम” बताते हुए कहा कि यह मुलाकात वोट-बैंक राजनीति से आगे बढ़कर वास्तविक संवाद की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बैठक में शामिल व्यक्तियों का चयन सोच-समझकर किया गया था, जो समाज के विविध पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
केवल औपचारिक नहीं थी बैठक
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि सरकार और मुस्लिम समुदाय के बीच विश्वास निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। यदि ऐसे संवाद लगातार जारी रहते हैं, तो यह सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत कर सकते हैं।
admin
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
