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महिला आरक्षण बिल पर मोदी का तीखा प्रहार : 'हमारा आत्मबल अजेय, हार स्वीकार नहीं, कांग्रेस और परिवारवादी राजनीति पर भी वार

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Apr 18, 2026
04:09 PM
'हमारा आत्मबल अजेय, हार स्वीकार नहीं, कांग्रेस और परिवारवादी राजनीति पर भी वार

नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भले ही आज संख्या बल साथ नहीं था, लेकिन यह अंत नहीं है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा—हमारा आत्मबल अजेय है, हम हारे नहीं हैं और आगे भी रुकेंगे नहीं।

विपक्ष पर गंभीर आरोप, विकास रोकने का ठहराया जिम्मेदार

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते देश के महत्वपूर्ण सुधार को रोक दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लगातार देश के विकास से जुड़े बड़े फैसलों का विरोध करते आए हैं। मोदी ने कहा कि यह वही मानसिकता है जिसने वर्षों तक सुधारों को टालने और अटकाने का काम किया।

नारी शक्ति के सपनों पर चोट का दावा

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की महिलाओं ने संसद से बड़े बदलाव की उम्मीद की थी, लेकिन उनके सपनों को झटका लगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरी कोशिश की, लेकिन आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। उन्होंने इसे नारी शक्ति के अधिकारों और आकांक्षाओं के लिए दुखद क्षण बताया।

कांग्रेस और परिवारवादी राजनीति पर तीखा वार

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और कुछ अन्य दलों पर सीधा हमला करते हुए कहा कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवादी राजनीति करने वाले दल नहीं चाहते कि उनके बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। मोदी ने कहा कि कांग्रेस का रवैया हमेशा से लटकाना और अटकाना वाला रहा है, जिसने देश के कई सुधारों को रोका।

माफी और आगे बढऩे का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने देश की माताओं और बहनों से क्षमा मांगते हुए कहा कि सरकार का प्रयास सफल नहीं हो सका, लेकिन यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और किसी भी बाधा को स्वीकार नहीं करेगी।

आंकड़ों में विधेयक की हार

लोकसभा में इस विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक था। कुल 528 वोट पड़े, जिनमें 298 वोट पक्ष में रहे, जबकि आवश्यक संख्या 352 थी। इस प्रकार यह विधेयक 54 वोटों से गिर गया।

संसद में विरोध और प्रदर्शन

विधेयक के गिरने के बाद संसद परिसर में राजनीतिक माहौल गरमा गया। भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नाराजगी व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बाधा बताया और इसे देश की महिलाओं के स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा करार दिया। प्रधानमंत्री के इस संबोधन को राजनीतिक रूप से बेहद आक्रामक माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखा।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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