रेपो रेट पर फिर ब्रेक : आरबीआई गवर्नर ने की फैसलों की घोषणा, EMI में राहत की उम्मीदों को झटका

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की ताजा बैठक में एक बार फिर रेपो रेट को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्रीय बैंक ने इसे 5.25% पर स्थिर बनाए रखा है। इसका सीधा असर यह है कि होम लोन, कार लोन या अन्य कर्ज लेने वालों की मासिक किस्त (EMI) में फिलहाल कोई कमी नहीं होने वाली है।
ब्याज दरें जस की तस, ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि समिति ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है। रेपो रेट के अलावा अन्य प्रमुख दरें भी स्थिर रखी गई हैं स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) 5.50% पर कायम हैं। साथ ही, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% रखा गया है।
2025 में मिली थी राहत, अब थमा सिलसिला
पिछले साल 2025 में आरबीआई ने लगातार कई बार रेपो रेट में कटौती की थी, जिससे कर्ज सस्ता हुआ और EMI में राहत मिली। कुल मिलाकर 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई थी। हालांकि, 2026 की शुरुआत से यह सिलसिला थम गया है और फरवरी के बाद अब दूसरी बार दरों को यथावत रखा गया है।
EMI पर कैसे पड़ता है असर?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर बढ़ती है, तो बैंकों के लिए उधार लेना महंगा हो जाता है और वे ग्राहकों के लिए लोन की ब्याज दर बढ़ा देते हैं। इससे EMI बढ़ती है। वहीं, रेपो रेट घटने पर EMI कम होने की संभावना रहती है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत मजबूत
गवर्नर ने वैश्विक परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मजबूत डॉलर जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। हालांकि, ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाएं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव चिंता का विषय बने हुए हैं। कुल मिलाकर, RBI का यह फैसला स्थिरता बनाए रखने की दिशा में है, लेकिन आम लोगों को फिलहाल EMI में राहत के लिए इंतजार करना होगा।
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