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बांग्लादेश में लोकतंत्र पर हमला : शेख हसीना का बड़ा आरोप, छात्र आंदोलन को बताया सत्ता पलटने की सुनियोजित साजिश

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 06, 2026
05:53 AM
शेख हसीना का बड़ा आरोप, छात्र आंदोलन को बताया सत्ता पलटने की सुनियोजित साजिश

नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल संवाद में 2024 के छात्र आंदोलन को सुनियोजित राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि इसका मकसद लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को सत्ता से बेदखल करना था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने आंदोलन को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने इसे हिंसक रूप देकर राजनीतिक हथियार बना दिया।

आंदोलन के पीछे थी सुनियोजित रणनीति

हसीना ने कहा कि आंदोलन का कोई स्पष्ट और जिम्मेदार नेतृत्व नहीं था। पूरे घटनाक्रम को पर्दे के पीछे से संचालित किया गया और योजनाबद्ध तरीके से हिंसा को बढ़ावा दिया गया। उनके अनुसार 15 जुलाई 2024 के बाद आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और हत्याएं, आगजनी, सरकारी संस्थानों पर हमले तथा लूटपाट की घटनाएं शुरू हो गईं।

आज का बांग्लादेश वैसा नहीं रहा

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह केवल पांच बार की प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी के रूप में भी अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने देश को भय, असुरक्षा और अराजकता के माहौल में देख रही हैं। उनके मुताबिक आज का बांग्लादेश उस देश से बिल्कुल अलग है, जिसके लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था।

वर्तमान सरकार पर भी साधा निशाना

हसीना ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी हालात नहीं सुधरे। उन्होंने कहा कि देश आज भी डर, आतंक, आर्थिक संकट और राजनीतिक दमन से जूझ रहा है। उनके दावे के अनुसार पिछले दो वर्षों में करीब 10 हजार लोग मारे गए या लापता हुए, 6.5 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया और हजारों मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ 600 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

विपक्ष और अल्पसंख्यक भी निशाने पर

पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि अवामी लीग के नेताओं, महिला कार्यकर्ताओं, अल्पसंख्यकों, पत्रकारों, न्यायाधीशों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों तक को उत्पीड़न, गिरफ्तारी और यातनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है और बांग्लादेश में कानून के शासन की स्थिति गंभीर संकट में पहुंच गई है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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