उद्धव के 6 सांसद शिंदे के साथ : शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट, लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिख अगल गुट के रूप मान्यता देने की अपील

मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी में ऑपरेशन टाइगर के जरिए टूट की बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल शिवसेना यूबीटी गुट के 9 में से 6 सांसदों ने अपना अलग रास्ता चुन लिया है। इन सभी सासदों ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की अपील की है। बागी सांसदों के इस कदम को उद्धव गुट के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इधर शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि उनके सांसदों को पार्टी बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्हें कुल 50 करोड़ रुपए दिए जाने हैं।
बताया जा रहा है कि जिन सांसदों ने यह पत्र सौंपा, उनमें संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचैरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। इन सभी ने कथित तौर पर एक साथ आगे बढ़ते हुए अपने अलग समूह के गठन की बात रखी है।
शिंदे गुट के साथ जाने की अटकलें तेज
सूत्रों के अनुसार, इन छह सांसदों के कदम को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से जोड़कर देखा जा रहा है। यह भी दावा किया जा रहा है कि ये सांसद बुधवार सुबह अलग-अलग शहरों नांदेड़, पुणे और मुंबई से निजी विमान के जरिए दिल्ली पहुंचे और वहां उन्होंने स्पीकर को समर्थन संबंधी पत्र सौंपा। इस दौरान शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता के मौजूद रहने की भी चर्चा है। हालांकि इस घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि सीमित है।
उद्धव गुट में अब केवल 3 सांसद
इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना (यूबीटी) खेमे में केवल 3 सांसदों के ही साथ रहने की बात सामने आ रही है। इनमें संजय राउत के आवास पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद सावंत, चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक सांसद राजाभाऊ शामिल बताए गए। पार्टी का कहना है कि उसके सांसद “मशाल” चुनाव चिह्न पर जीतकर आए हैं और जनता का जनादेश उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मिला है।
राउत का तीखा बयान और आगे की चुनौती
शिवसेना (यूबीटी) की ओर से संजय राउत ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सांसद अलग रास्ता चुनता है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि पार्टी किसी भी तरह के दलबदल को आसानी से स्वीकार नहीं करेगी और कानूनी व राजनीतिक स्तर पर पूरी मजबूती से जवाब देगी।
महाराष्ट्र की सियासत में बढ़ी गर्मी
इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल बढ़ा दी है। जहां एक ओर इसे शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह देखना अहम होगा कि स्पीकर इस पत्र और दावों पर क्या रुख अपनाते हैं और आगे की राजनीतिक दिशा क्या बनती है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
