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प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र की बड़ी जीत : सोमन वांगचुक बोले- अब जवाबदेही के बाद सुधारों का समय

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 25, 2026
10:50 AM
सोमन वांगचुक बोले- अब जवाबदेही के बाद सुधारों का समय

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन, धैर्य और लगातार जारी जनसंघर्ष का परिणाम है। वांगचुक ने कहा कि अब केवल जवाबदेही तय करने का समय नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की जरूरत है।

सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह जीत सीधे सड़कों पर उतरे लोकतांत्रिक आंदोलन की जीत है। उन्होंने कहा कि यह शांति, संयम और दृढ़ संकल्प की सफलता है। उन्होंने आंदोलन में शामिल युवाओं और नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि देशभर के लोगों ने भय और दबाव से ऊपर उठकर अपनी आवाज बुलंद की, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।

वांगचुक ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि जवाबदेही तय होने के बाद अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

नीट विवाद के बीच तेज हुआ था आंदोलन

नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विभिन्न संगठनों और छात्रों ने लगातार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। इसी मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया।

धर्मेंद्र प्रधान ने सौंपा इस्तीफा

इस्तीफा देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। उन्होंने अपने संदेश में स्वीकार किया कि नीट-यूजी परीक्षा के बाद सामने आई अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ाईं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी, परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया। साथ ही आगामी वर्षों में परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

प्रधान ने कहा कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

छात्रों के हित को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्तिगत पद या प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि युवा राजनीतिक विवादों या लंबे कानूनी संघर्षों में उलझें। छात्रों के हितों की रक्षा, शिक्षा व्यवस्था में विश्वास कायम रखने और उन्हें अपने भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देने के उद्देश्य से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार शिक्षा सुधारों को किस दिशा में आगे बढ़ाती है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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