शनिवार, 7 नवंबर 202603:53:43 PM
Download App
Home/देश

इमरजेंसी को लेकर सोनिया ने इंदिरा का किया बचाव : केन्द्र सरकार पर बोला हमला, कहा-12 साल में लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को पहुंचा भारी नुकसान

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Nov 07, 2026
07:07 AM
केन्द्र सरकार पर बोला हमला, कहा-12 साल में लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को पहुंचा भारी नुकसान

नई दिल्ली। कांग्रेस की सीनियर नेता ओर पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1975 में लगाए गए इमरजेंसी को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बचाव किया है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी लोकतंत्र में विश्वास रखती थीं और इमरजेंसी के दौरान हुई घटनाओं का उन्हें एहसास हुआ था। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया की देश में आपातकाल लगाना बड़ी गलती थी। इस दौरान उन्होंने केन्द्र की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा।

सोनिया गांधी ने वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल पर भी अपनी बात रखते हुए स्वीकार किया कि आपातकाल के दौरान 21 महीनों तक लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगी रही और बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हैबियस कॉर्पस के अधिकार को भी निलंबित कर दिया गया था।

उन्होंने कहा, इमरजेंसी के बाद ही मुझे पता चला कि उस दौरान वास्तव में क्या हो रहा था और हालात कितने गंभीर थे। हां, लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाई गई थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार को भी निलंबित कर दिया गया था, लेकिन यह सब संवैधानिक तरीके से किया गया था।

इंदिरा गांधी ने खुद समझी स्थिति, 1977 में कराया चुनाव

आपातकाल के दौरान देश में पैदा हुए हालात पर चर्चा करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि उस समय हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन को आग के हवाले किया जा रहा था। उनके मुताबिक, बड़े पैमाने पर संगठित अशांति फैली हुई थी। यहां तक कि नौकरशाही और सशस्त्र बलों से भी सरकारी आदेशों की अवहेलना करने की अपील की गई थी।

इंदिरा ने बाद में समझा परिस्थितियों को

उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में परिस्थितियों को समझा और मार्च 1977 में आम चुनाव कराने का फैसला लिया। सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया और माफी भी मांगी थी।

वहीं केन्द्र सरकार पर हमला बोलते हुए सोनिया गांधी ने आरापे लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र, संवैधानिक व्यवस्था और संस्थाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है। सोनिया गांधी ने कहा कि अब देश के लोग इस नुकसान को महसूस करने लगे हैं और उन्हें बेहतर शासन व्यवस्था की जरूरत समझ में आ रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय मतदाता एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं को मजबूत करने का समर्थन करेंगे।

लोकतंत्र और संस्थाओं को पहुंचा भारी नुकसान

अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की बुनियाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के जाने के बाद भी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को दोबारा मजबूत करने में समय लगेगा। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को गंभीर प्रयास करने होंगे।

सोनिया गांधी ने कहा, इस सरकार के जाने के बाद भी हमारी व्यवस्थाओं को फिर से सही स्थिति में लाने में समय लगेगा। इसके लिए राजनीतिक दलों को काफी प्रयास करने होंगे। लोग अब बेचैन होने लगे हैं और उन्हें हो रहे नुकसान का एहसास हो रहा है। लेकिन मैं आशावादी हूं और मुझे विश्वास है कि भारत के लोग बेहतर शासन व्यवस्था की वापसी का स्वागत करेंगे।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें