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आतंकियों के हक पर सवाल, पीड़ितों के दर्द का क्या? : यूएन में भारत ने पाकिस्तान को ऐसे लगाई लताड़

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 23, 2026
06:13 AM
यूएन में भारत ने पाकिस्तान को ऐसे लगाई लताड़

संयुक्त राष्ट्र। धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने धार्मिक या आस्था की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नजीला घनेया की रिपोर्ट की आलोचना करते हुए उसमें पक्षपात का आरोप लगाया। भारत ने कहा कि रिपोर्ट में आतंकवाद की गंभीरता और उसके पीड़ितों के अधिकारों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान को भी उसके आरोपों पर करारा जवाब दिया।

आतंकवाद के पीड़ितों के अधिकारों पर भारत का जोरदार सवाल

भाविका मंगलानंदन ने कहा कि लोगों के दर्द और नुकसान का राजनीतिक लाभ उठाना किसी विशेष दूत की रिपोर्ट का आधार नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आतंकवादियों के अधिकारों की पैरवी तो जोरदार तरीके से की जाती है, लेकिन आतंकवाद के पीड़ितों के प्रति वैसी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई देती?

उन्होंने कहा कि आतंकवादी निर्दोष लोगों की जान लेकर उनके जीवन के बुनियादी अधिकार का उल्लंघन करते हैं। उनका प्रभाव केवल पीड़ित परिवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे देश के मनोबल और सामाजिक विश्वास को भी नुकसान पहुंचाता है।

कश्मीर और सीएए से जुड़े मामलों का रिपोर्ट में उल्लेख

विशेष दूत की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कश्मीर में सुरक्षा अभियानों के दौरान मारे गए कुछ लोगों के शव उनके परिजनों को नहीं सौंपे गए और उन्हें दूरस्थ इलाकों में दफनाया गया। रिपोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए कुछ लोगों के अंतिम संस्कार पर कथित प्रतिबंधों का भी जिक्र किया गया था।

भारत ने रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान दफनाने से जुड़े कथित भेदभाव का उल्लेख मुख्य रूप से विकासशील देशों के संदर्भ में किया गया।

न्यूयॉर्क का उदाहरण देकर रिपोर्ट पर साधा निशाना

मंगलानंदन ने सवाल किया कि विकसित देशों में हुई ऐसी ही घटनाओं को रिपोर्ट में शामिल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने न्यूयॉर्क में कोविड-19 के दौरान मृतकों को हार्ट आइलैंड पर सामूहिक कब्रों में दफनाए जाने की घटनाओं का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट के चयनात्मक दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई।

पाकिस्तान को कारगिल युद्ध की याद दिलाई

बैठक में पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने 1999 के कारगिल युद्ध का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अपने सैनिकों के शव स्वीकार नहीं किए जाने के इतिहास के बावजूद धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों पर सवाल उठाना विडंबनापूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया था।

अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी घेरा

भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उनके अधिकारों में कमी का मुद्दा उठाया। मंगलानंदन ने कहा कि पाकिस्तान को भारत पर लगातार टिप्पणी करने के बजाय अपने यहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान से कश्मीर के उस हिस्से पर भी ध्यान देने को कहा, जिस पर भारत अवैध कब्जे का आरोप लगाता है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस बयान ने धार्मिक स्वतंत्रता, आतंकवाद और मानवाधिकारों को लेकर जारी बहस में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक टकराव को एक बार फिर सामने ला दिया।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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