दुनिया के बड़े बाजारों पर भारत की नजर : केन्द्रीय मंत्री का दावाः 85 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंचेगा भारतीय कारोबार!

नई दिल्ली। भारत की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाने और देश के कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को महत्वपूर्ण माध्यम मान रही है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘दिल्ली डायलॉग भविष्य के लिए तैयार भारत की नीतियां’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत के नए व्यापार समझौतों से अगले डेढ़ साल के आसपास विकसित देशों के उन बाजारों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंच मिलने की उम्मीद है, जिनकी संयुक्त जीडीपी करीब 85 ट्रिलियन डॉलर है। इससे भारतीय उद्योगों, उद्यमियों, युवाओं और स्टार्टअप के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत दावेदारी
केन्द्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि भारत वैश्विक बाजार का हिस्सा बनकर रोजगार, कारोबार और नवाचार के नए अवसर पैदा करना चाहता है। इसके लिए देश को दोहरी रणनीति अपनानी होगी। एक ओर दुनिया की बेहतरीन तकनीक को अपनाना होगा, वहीं दूसरी ओर ऐसे क्षेत्रों की पहचान करनी होगी, जहां रोजगार और व्यावसायिक विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, विशाल घरेलू बाजार
केंद्रीय मंत्री ने भारत की आर्थिक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार क्रय शक्ति के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 16 ट्रिलियन डॉलर है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब की आबादी, युवा कार्यबल और तेज विकास दर भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं।
पर्यटन को बताया एआई के दौर में भी संभावनाओं वाला क्षेत्र
गोयल ने पर्यटन को रोजगार और कारोबार बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि पर्यटन ऐसा क्षेत्र है, जिस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सीधा विकल्प बनने का खतरा सीमित है। इसके बजाय एआई पर्यटन सेवाओं, प्रचार और पर्यटकों तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
किसानों और छोटे उद्योगों के हितों की भी सुरक्षा
व्यापार समझौतों पर बातचीत की रणनीति बताते हुए गोयल ने कहा कि सरकार पहले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करती है। किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हितों को ध्यान में रखते हुए तय किया जाता है कि किन क्षेत्रों में विदेशी प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सकती है और किन्हें संरक्षण की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत दूसरे देशों की आर्थिक संवेदनशीलताओं का भी सम्मान करता है। गोयल के मुताबिक, बातचीत का मूल सिद्धांत हैकृ“आप मेरी संवेदनशीलता का सम्मान करें, मैं आपकी संवेदनशीलता का सम्मान करूंगा।” सरकार की रणनीति का उद्देश्य वैश्विक बाजारों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के साथ घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा करना और देश के लिए दीर्घकालिक आर्थिक अवसर तैयार करना है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
