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पश्चिम बंगाल एसआईआर : वोटिंग प्रतिशत ने खोली सच्चाई की परत, विपक्ष के दावों पर सुप्रीम टिप्पणी

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Apr 24, 2026
07:57 AM
वोटिंग प्रतिशत ने खोली सच्चाई की परत, विपक्ष के दावों पर सुप्रीम टिप्पणी

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) विवाद पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि हर छोटे-बड़े मामले में सीधे दखल की अपेक्षा करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। अदालत की टिप्पणी ने एक तरह से विपक्ष के उन आरोपों को भी आईना दिखा दिया, जिनमें चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे थे।

हाईकोर्ट जाने की सलाह, सुप्रीम कोर्ट ने खींची सीमा रेखा

सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि 34 लाख मामलों में से केवल 139 अपीलों का निपटारा हुआ है। इस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों के समाधान के लिए संबंधित पक्षों को कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट प्रशासनिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से देख सकता है। सुप्रीम कोर्ट हर व्यक्तिगत मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, और न ही यह व्यावहारिक है।

शांतिपूर्ण मतदान पर सीजेआई की खुशी, विपक्ष के आरोप कमजोर

सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी में सीजेआई सूर्य कांत ने पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि “एक नागरिक के तौर पर मुझे खुशी हुई कि इस बार मतदान शांतिपूर्ण रहा और प्रतिशत भी अच्छा रहा।” यह बयान उन राजनीतिक आरोपों के बीच आया है, जिनमें चुनावी हिंसा और गड़बड़ी के दावे किए जा रहे थे। अदालत की यह टिप्पणी विपक्ष के दावों को कमजोर करती नजर आई।

एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख

अदालत ने दोहराया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके लिए पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। ऐसे मामलों में पहले अपीलीय ट्रिब्यूनल या संबंधित प्राधिकरण के पास जाना जरूरी है। चुनाव ड्यूटी में तैनात 65 अधिकारियों की याचिका पर भी कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया और कहा कि उचित मंच पर पहले सुनवाई होनी चाहिए।

न्यायिक प्रक्रिया बनाम राजनीतिक बयानबाजी

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने यह साफ कर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है और हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर सीधे शीर्ष अदालत तक ले जाना उचित नहीं। साथ ही, शांतिपूर्ण मतदान की सराहना ने यह भी संकेत दिया कि जमीनी हकीकत कई बार राजनीतिक दावों से अलग होती है।

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