क्रूड ऑयल और गैस की कीमतों का असर : अप्रैल में थोक महंगाई 8.3ः पर पहुंची, ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाया दबाव

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में तनाव के बीच अप्रैल में भारत की थोक महंगाई दर तेजी से बढ़कर 8.3ः हो गई, जो मौजूदा सीरीज में सबसे ज्यादा है। मार्च में महंगाई दर 3.88 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसकी तुलना में अप्रैल में महंगाई दर लगभग दोगुना रही। इस तेज उछाल की मुख्य वजह कच्चे तेल, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी रही।
आंकड़ों के मुताबिक, फ्यूल एंड पावर सेक्टर में महंगाई दर 24.71 प्रतिशत दर्ज की गई, जो कुल थोक महंगाई को ऊपर खींचने में सबसे बड़ा कारण बनी। खासकर क्रूड पेट्रोलियम की कीमतों में सालाना आधार पर 88.06 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई। वहीं एलपीजी की कीमतों में भी 10.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। ऊर्जा लागत में इस बढ़ोतरी का सीधा असर उत्पादन और ट्रांसपोर्ट खर्च पर पड़ता है, जिससे आगे चलकर अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और प्राथमिक वस्तुओं में भी बढ़ोतरी
मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स में थोक महंगाई दर 4.62 प्रतिशत रही, जबकि प्राइमरी आर्टिकल्स में यह 9.17 प्रतिशत दर्ज की गई। बेसिक मेटल्स और अन्य औद्योगिक इनपुट्स की कीमतों में वृद्धि ने भी समग्र महंगाई को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभाई। हालांकि राहत की बात यह रही कि खाद्य उत्पादों में महंगाई अपेक्षाकृत कम रही और यह 2.31 प्रतिशत पर बनी रही। इससे संकेत मिलता है कि खाद्य आपूर्ति स्थिति फिलहाल नियंत्रित बनी हुई है।
खुदरा महंगाई में मामूली बढ़त, लेकिन नियंत्रण में स्थिति
इसी अवधि में खुदरा महंगाई दर 3.48 प्रतिशत रही, जो मार्च के 3.40 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 3.74 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.16 प्रतिशत दर्ज की गई। खाद्य महंगाई भी 4.20 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने की तुलना में थोड़ी बढ़ी है। राज्यवार आंकड़ों में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और राजस्थान में खुदरा महंगाई अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई।
भविष्य का अनुमान और आर्थिक संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक ने 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान जताया है। बेहतर रबी फसल और खाद्य आपूर्ति में सुधार से आने वाले महीनों में कीमतों पर कुछ नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है। कुल मिलाकर, फिलहाल महंगाई पर ऊर्जा कीमतों का दबाव बना हुआ है, लेकिन खाद्य क्षेत्र की स्थिरता ने बड़े झटके से अर्थव्यवस्था को बचाए रखा है।
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