नई राजनीति की धुरीः : ‘नारी शक्ति’ बनी चुनावों की असली गेमचेंजर, 2024 के बाद बदली तस्वीर

नई दिल्ली। भारत की राजनीति में 2024 के आम चुनाव एक निर्णायक मोड़ साबित हुए। लंबे समय तक चुनावी रणनीति का केंद्र युवा और जातीय समीकरण रहे, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। महिला मतदाता, जिन्हें कभी “आधी आबादी” कहा जाता था, अब चुनावों की दिशा तय करने वाली सबसे प्रभावशाली ताकत बन गई हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में पहली बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से आगे निकल गया। जहां पुरुषों का टर्नआउट 65.55 फीसदी रहा, वहीं महिलाओं ने 65.78 प्रतिशत की भागीदारी दर्ज कर इतिहास रच दिया। करीब 31 करोड़ से अधिक महिलाओं ने वोट डालकर यह साबित कर दिया कि अब वे केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका में हैं।
विधानसभा चुनावों में भी दिखा असर
यह बदलाव सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं रहा। झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
बिहार में तो महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6ः तक पहुंच गया, जो पुरुषों से लगभग 9ः अधिक था। यह साफ संकेत है कि महिला वोटर अब संगठित और जागरूक हो चुकी हैं।
सरकारी योजनाओं का बड़ा योगदान
महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी के पीछे सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं की बड़ी भूमिका रही है।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए महिलाओं के खाते में सीधी राशि पहुंची
स्वयं सहायता समूहों और मुद्रा लोन ने आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाई
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों का मालिकाना हक मिलने से सुरक्षा और सम्मान की भावना मजबूत हुई
इन योजनाओं ने महिलाओं को न केवल सशक्त किया, बल्कि उन्हें राजनीतिक रूप से भी जागरूक बनाया।
जीवन स्तर में सुधार, वोटिंग में इजाफा
स्वच्छ भारत अभियान, हर घर जल योजना और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं ने महिलाओं के दैनिक जीवन को आसान बनाया। इन सुधारों का सीधा असर उनके मतदान व्यवहार में देखने को मिला। अब वे अपने हितों को ध्यान में रखकर वोट करती हैं।
राजनीतिक दलों की बदली रणनीति
अब राजनीतिक पार्टियां केवल युवा या जाति समीकरणों पर निर्भर नहीं हैं। महिला वोटर्स को ध्यान में रखते हुए घोषणापत्र तैयार किए जा रहे हैं। ‘लाड़ली बहन’, ‘महिला सम्मान’ जैसी योजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं, जो सीधे महिलाओं को लक्षित करती हैं।
स्वतंत्र वोट बैंक के रूप में उभरी महिलाएं
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि महिलाएं अब स्वतंत्र वोट बैंक बन चुकी हैं। वे परिवार के पुरुषों के प्रभाव से बाहर निकलकर खुद निर्णय ले रही हैं। उनकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैंकृसुरक्षा, सम्मान और आर्थिक स्थिरता।
भविष्य की राजनीति का संकेत
महिला आरक्षण जैसे प्रस्ताव और बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि आने वाले समय में भारतीय राजनीति पूरी तरह “जेंडर-सेंट्रिक” हो सकती है। 2024 के बाद का दौर यह साबित करता है कि अब चुनाव जीतने के लिए महिलाओं का विश्वास जीतना अनिवार्य हो गया है।
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