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20 घंटे से ज्यादा चली बहस बेअसर : लोकसभा में महिला आरक्षण बिल धड़ाम, 54 वोट से हार ने सरकार को दिया बड़ा झटका

admin

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Apr 18, 2026
05:41 AM
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल धड़ाम, 54 वोट से हार ने सरकार को दिया बड़ा झटका

नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर लोकसभा में लंबी और तीखी बहस के बाद अंततः सरकार को बड़ा झटका लगा। करीब 20 घंटे से अधिक चली चर्चा, प्रधानमंत्री की अपील और सत्तापक्ष के जोरदार प्रयासों के बावजूद यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और 54 वोटों से गिर गया।

लोकसभा में इस बिल पर कुल 528 वोट पड़े, जिसमें से 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया। संविधान संशोधन बिल को पारित कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार इस आंकड़े से काफी पीछे रह गई। नतीजतन, महिला आरक्षण से जुड़ा यह महत्वपूर्ण बिल सदन में पारित नहीं हो सका।

इस बिल को लेकर गुरुवार को सुबह 11 बजे से लेकर देर रात एक बजे के बाद तक चर्चा चली थी। इसके बाद शुक्रवार को भी सुबह से शाम तक बहस जारी रही। कुल मिलाकर लगभग 20 घंटे से अधिक समय तक सांसदों ने इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटिंग से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सांसदों से “अंतरात्मा की आवाज” पर वोट करने की अपील की थी। उन्होंने विपक्ष को बिल पारित कराने का श्रेय देने की भी बात कही, लेकिन यह रणनीति भी असरदार साबित नहीं हुई।

गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए विपक्षी दलों—कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य पार्टियों—पर बिल गिराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए थी। वहीं, बिल के गिरने के बाद भाजपा की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया और पार्टी ने 18 अप्रैल से राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है।

दूसरी ओर, विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, लेकिन परिसीमन (डिलिमिटेशन) के प्रावधान को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं। विपक्षी सांसदों का कहना था कि इस प्रक्रिया के बिना आरक्षण लागू करने का तरीका स्पष्ट नहीं है, इसलिए उन्होंने बिल का विरोध किया।

गौरतलब है कि बजट सत्र के अंतिम दिनों में सरकार ने विशेष रूप से इस बिल को पारित कराने के लिए सदन की कार्यवाही बढ़ाने का फैसला लिया था। हालांकि, विपक्ष ने चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, जिसे सरकार ने अस्वीकार कर दिया।

महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर बिल का गिरना न सिर्फ राजनीतिक तौर पर बड़ा घटनाक्रम है, बल्कि यह आने वाले दिनों में सियासी माहौल को और गर्माने के संकेत भी दे रहा है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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