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FSSAI की ये गाइडलाइंस : इडली-डोसा बैटर के लिए FSSAI की नई गाइडलाइन्स, क्या आपके घर आने वाला घोल सुरक्षित है?

खुशी राज

खुशी राज

Apr 19, 2026
09:38 AM
इडली-डोसा बैटर के लिए FSSAI की नई गाइडलाइन्स, क्या आपके घर आने वाला घोल सुरक्षित है?

अगर आप सुबह के नाश्ते में इडली-डोसा खाने के शौकीन हैं या बाजार से इसका तैयार घोल (बैटर) खरीदते हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने फर्मेंटेड फूड को लेकर नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। अब गली-मोहल्ले की दुकानों से लेकर बड़े ब्रांड्स तक, कोई भी बिना नियमों के बैटर नहीं बेच पाएगा।

भारत में इडली और डोसा केवल भोजन नहीं, एक भावना है और इस स्वाद का असली हीरो 'फर्मेंटेशन' है?।भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर नए और कड़े नियम लागू किए हैं। विशेष रूप से गर्मियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, ये गाइडलाइन्स यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि आपकी थाली तक पहुंचने वाला फर्मेंटेड फूड बैक्टीरिया मुक्त और पौष्टिक हो।

क्यों पड़ी इन कड़े नियमों की जरूरत?

गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ ही किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया अनियंत्रित हो जाती है। FSSAI के शोध के अनुसार, 35°C से अधिक तापमान पर बैटर में 'ई-कोलाई' और 'साल्मोनेला' जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पनपने की संभावना 40% तक बढ़ जाती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए नए मानक तय किए गए हैं।

जानिए FSSAI के क्या है दिशा-निर्देश?

  1. तापमान नियंत्रण: बैटर को उत्पादन से लेकर बिक्री तक 4°C से 8°C के बीच रखना अनिवार्य है।

  2. डिस्प्ले नियम: दुकानों में बैटर को सीधी धूप या बिना फ्रिज के रखना अब कानूनी अपराध माना जाएगा।

  3. स्पष्ट लेबलिंग: पैकेट पर 'बेस्ट बिफोर' के साथ-साथ 'पैकेट खोलने के बाद इस्तेमाल की समय सीमा' (जैसे 24 घंटे) लिखना जरूरी है।

  4. हाइजीन का ख्याल: खाने-पीने के सभी सामान FSSAI के शेड्यूल 4 के तहत तय की गई साफ-सफाई और स्वच्छता की कड़ी शर्तों के अनुसार ही बनाए जाने चाहिए।

  5. प्रोबायोटिक के नियम: अगर कोई कंपनी अपने प्रोडक्ट में 'प्रोबायोटिक' होने का दावा करती है, तो उसे प्रति सर्विंग के हिसाब से तय 'CFU' (कॉलनी फॉर्मिंग यूनिट) की गिनती के मानकों पर खरा उतरना होगा।

  6. अम्लता का स्तर (Acidity Level): घोल में लैक्टिक एसिड की मात्रा 0.45% से कम नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि फर्मेंटेशन प्राकृतिक और सुरक्षित है।

  7. पीएच (pH) संतुलन: बैटर का पीएच स्तर एक निर्धारित सीमा के भीतर होना चाहिए ताकि वह पेट में जाकर एसिडिटी का कारण न बने।

  8. प्रोबायोटिक मानक: यदि कोई ब्रांड अपने उत्पाद को 'गट-हेल्थ' के लिए अच्छा बताता है, तो उसे जीवित सूक्ष्मजीवों (Good Bacteria) की संख्या का लैब सर्टिफिकेट देना होगा।

  9. सामग्री की शुद्धता: चावल और दाल के अलावा इस्तेमाल होने वाले किसी भी प्रिजर्वेटिव की जानकारी पैकेट पर बड़े अक्षरों में होनी अनिवार्य है।

व्यापारियों (FBOs) के लिए नई पंजीकरण व्यवस्था

खाद्य व्यापारियों की सुविधा के लिए नियमों को थोड़ा सरल भी बनाया गया है। स्थायी लाइसेंस यानी अब छोटे विक्रेताओं को हर साल रिन्यूअल के लिए भटकना नहीं होगा, बशर्ते वे वार्षिक ऑडिट में सही पाए जाएं। हर बैच की तैयारी और सफाई का रिकॉर्ड अब डिजिटल पोर्टल (FoSCoS) पर अपलोड करना होगा। साथ ही बैटर बनाने वाले कर्मचारियों को FSSAI द्वारा प्रमाणित स्वच्छता ट्रेनिंग (FoSTaC) लेना अनिवार्य है।

उपभोक्ताओं के लिए 'सेफ्टी गाइड'

इसलीए हमेशा वही बैटर खरीदें जिस पर FSSAI का 14 अंकों का लाइसेंस नंबर मौजूद हो। यदि घोल से बहुत तीखी खट्टी महक आए या उसमें बुलबुले बहुत ज्यादा (Over-fermented) हों, तो उसका उपयोग न करें। खराब बैटर अक्सर हल्का पीला या मटमैला दिखने लगता है, ताजा बैटर दूधिया सफेद होना चाहिए। याद रखें, गर्मियों के दिनों में फर्मेंटेड खाने को हमेशा फ्रिज में रखें और ताजा ही खाएं।

खुशी राज
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खुशी राज

छात्रों और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रिपोर्टिंग। उत्साही तेवर। तेज़-तर्रार। अहम विषयों पर केंद्रित। लक्ष्य है- समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव।

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