12 बजे उठते थे, शाम को सजती थी महफिल : योगी का अखिलेश पर तीखा हमला, कहा- गिनाई अपनी उपलब्धियां

लखनऊ। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर शुक्रवार को लखनऊ में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए और कार्यक्रम को संबोधित किया। इस उन्होंने जहां हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। वहीं सपा अध्यक्ष अखिले यादव पर जोरदार हमला भी बोला। योगी ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि वे 12 बजे सोकर उठते थे, शाम को महफिल सजती थी, ऐसे में प्रदेश का विकास कैसे होता। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में विकास नहीं, बल्कि वोट बैंक और परिवारवाद की राजनीति होती थी।
स्वदेशी आंदोलन से जोड़ा हथकरघा दिवस
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अगस्त केवल राष्ट्रीय हथकरघा दिवस ही नहीं, बल्कि स्वदेशी आंदोलन का भी ऐतिहासिक दिन है। वर्ष 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन ने देश को आत्मनिर्भरता का संदेश दिया और स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि हथकरघा उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत है और लाखों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
बुनकरों और कारीगरों को मिल रहा लाभ
सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में करीब ढाई लाख परिवार सीधे हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं, जबकि पावरलूम क्षेत्र सहित लगभग 30 लाख लोगों की रोजी-रोटी इस उद्योग पर निर्भर है। सरकार ने पिछले वर्ष 40 हजार हस्तशिल्पियों को 109 करोड़ रुपये की विद्युत सुविधा उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि भदोही का कालीन उद्योग भी अब वैश्विक बाजार में नई पहचान बना चुका है।
बबुआ पर कसा तंज
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, कुछ लोग जीवनभर बबुआ ही बने रहते हैं। 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे, 5 बजे जिम जाते थे और 7 बजे महफिल सज जाती थी। फिर प्रदेश के विकास के लिए समय कहां बचता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकार का ध्यान विकास के बजाय वोट बैंक की राजनीति पर था।
2017 से पहले की स्थिति पर हमला
सीएम योगी ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश दंगों, लंबे कर्फ्यू, इंसेफेलाइटिस, डेंगू और खराब कानून व्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझता था। सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव था, जबकि आज शिक्षा, सड़क, बिजली और सुरक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित माहौल का सबसे बड़ा लाभ हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं और कारीगरों को मिला है।
प्रफुल्ल तिवारी
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