चुनावी पारदर्शिता पर विपक्ष की सुप्रीम कोर्ट से गुहार : 23 दलों ने सीजेआई को लिखा संयुक्त पत्र, एसआईआर पर रोक की मांग, खड़गे-राहुल के भी हस्ताक्षर

नई दिल्ली। देश के 23 विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को संयुक्त पत्र भेजा है। पत्र में विपक्षी नेताओं ने मतदाता सत्यापन की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा प्रभावित हो रही है।
राहुल-खरगे समेत कई दिग्गज नेताओं के हस्ताक्षर
पत्र पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित इंडी गठबंधन और अन्य विपक्षी दलों के कुल 23 नेताओं के हस्ताक्षर हैं। नेताओं ने कहा कि यह कदम असाधारण परिस्थितियों में उठाया गया है, क्योंकि लोकतंत्र के प्रमुख संस्थानों पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। पत्र में दावा किया गया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण कई चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।
एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विपक्ष ने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर सबसे अधिक आपत्ति जताई है। पत्र में आरोप लगाया गया कि यह प्रक्रिया बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर कर सकती है। विपक्ष का कहना है कि गरीब, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और अशिक्षित वर्ग के लोगों के पास आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण उनके मतदान अधिकार प्रभावित होने का खतरा है।
मतदाता सूची और ईवीएम पर भी चिंता
पत्र में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए दावा किया गया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए थे। विपक्ष ने कुछ न्यायिक ट्रिब्यूनलों के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि कई मामलों में मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई अनुचित पाई गई। इसके साथ ही नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुए बैलेट पेपर प्रणाली पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता बताई।
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप
विपक्षी दलों ने पत्र में आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। पत्र के अंत में नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के संरक्षक के रूप में हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि जब अन्य संस्थाओं पर सवाल उठते हैं, तब नागरिकों की अंतिम उम्मीद न्यायपालिका ही होती है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
