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MP की ECONOMY को नई रफ्तार देने का लक्ष्य : 2026-27 के लिए 5 लाख करोड़ से अधिक का क्रेडिट प्लान जारी: CS जैन ने दिए सख्त निर्देश

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Jul 03, 2026
04:39 PM
2026-27 के लिए 5 लाख करोड़ से अधिक का क्रेडिट प्लान जारी: CS जैन ने दिए सख्त निर्देश

भोपाल। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में शुक्रवार को वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के समन्वयकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने जिलों से प्राप्त जिला स्तरीय क्रेडिट प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया और कहा कि इन योजनाओं को धरातल पर उतारकर ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा तैयार वार्षिक साख योजना 2026-27 का विधिवत विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रदेश के आर्थिक विकास की दिशा और गति तय करने वाला एक महत्वपूर्ण रोडमैप है।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, आयुक्त संस्थागत वित्त सुश्री सोनिया मीना, भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री सुजाता लाल, नाबार्ड के उपमहाप्रबंधक श्री विजेंद्र सिंह, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के उपमहाप्रबंधक श्री पवन कुमार अग्रवाल, भारतीय स्टेट बैंक के महाप्रबंधक श्री निशंका रॉय सहित कई वरिष्ठ बैंक अधिकारी उपस्थित रहे।

5,00,856 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी वार्षिक क्रेडिट लक्ष्य

जारी क्रेडिट प्लान के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल वार्षिक ऋण योजना का लक्ष्य 5,00,856 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। यह पिछले वर्ष के लक्ष्य 4,19,110 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 119.50 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश में आर्थिक गतिविधियों, निवेश, कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में तेज विस्तार की संभावनाएं बन रही हैं। सरकार और बैंकिंग संस्थानों ने संयुक्त रूप से यह लक्ष्य तय किया है कि राज्य में ऋण प्रवाह को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि केवल लक्ष्य निर्धारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका समयबद्ध और शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

कृषि क्षेत्र को मिली सर्वोच्च प्राथमिकता

क्रेडिट प्लान में कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। फार्म क्रेडिट के लिए 1,28,866 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 106.56 प्रतिशत अधिक है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले मध्यप्रदेश में यह लक्ष्य किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे खेती में आधुनिक तकनीक, सिंचाई व्यवस्था, कृषि यंत्रीकरण और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। फसल ऋण के लिए 88,638 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले वर्ष के लक्ष्य की तुलना में 101.22 प्रतिशत और उपलब्धि के मुकाबले 122.36 प्रतिशत अधिक है। कुल कृषि क्षेत्र के लिए 1,65,117 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो न केवल कृषि विकास को गति देगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि कृषि ऋण योजनाओं का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता देना नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को ऋण प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो और प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि ऋण का समय पर वितरण और उसकी वसूली दोनों ही पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता बनी रहे और किसानों को लगातार वित्तीय सहायता मिलती रहे।

एमएसएमई सेक्टर बनेगा आर्थिक विकास का इंजन

प्रदेश की उद्योगोन्मुखी नीतियों को देखते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के लिए 1,62,967 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। यह लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में 121.64 प्रतिशत अधिक है, जो राज्य में तेजी से बढ़ते औद्योगिक माहौल को दर्शाता है। एमएसएमई सेक्टर को मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का “ग्रोथ इंजन” माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार सृजन करता है। मुख्य सचिव ने कहा कि बैंकिंग संस्थानों को इस क्षेत्र में ऋण वितरण को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि नए उद्यमों की स्थापना हो सके और रोजगार के अवसर बढ़ें।

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