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रासायनिक खाद को किसानों ने कहा NO : 50 एकड़ में जैविक खेती, 35 क्विंटल धान का दावा; जानिए धमतरी के नवागांव की कहानी

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Oct 02, 2026
06:55 AM
50 एकड़ में जैविक खेती, 35 क्विंटल धान का दावा; जानिए धमतरी के नवागांव की कहानी

Dhamtari News: रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का नवागांव खुर्द जैविक खेती को लेकर मिसाल पेश कर रहा है। गांव के किसान गोबर खाद और अन्य जैविक खादों का इस्तेमाल कर खेती कर रहे हैं। किसानों का दावा है कि जैविक तरीके से खेती करने के बावजूद उन्हें धान की अच्छी पैदावार मिल रही है और कुछ किसान करीब 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन ले रहे हैं।

150 एकड़ में होती है खेती

धमतरी जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित नवागांव खुर्द में करीब 250 लोगों की आबादी है। गांव में लगभग 150 एकड़ जमीन पर खेती की जाती है। यहां किसान धान के अलावा दलहन, तिलहन और सब्जियों की भी खेती करते हैं। गांव की खासियत यह है कि कई किसान खेती में रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करते हुए पशुपालन से मिलने वाली गोबर खाद और जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं।

GFX FACT

  • करीब 250 — गांव की आबादी

  • करीब 150 एकड़ — खेती का रकबा

  • धान, दलहन, तिलहन और सब्जियां — प्रमुख फसलें

  • गोबर खाद — जैविक खेती में इस्तेमाल

35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन का दावा

धमतरी जिले में धान की औसत पैदावार करीब 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ बताई जाती है। वहीं नवागांव खुर्द के किसान करीब 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान उत्पादन लेने का दावा कर रहे हैं।

किसानों के मुताबिक इसके पीछे जैविक खाद का इस्तेमाल एक अहम वजह है। उनका कहना है कि पशुपालन से मिलने वाली गोबर खाद को खेतों में इस्तेमाल करने से रासायनिक खाद पर निर्भरता कम रखने में मदद मिलती है।

किसानों का यह भी कहना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से खेती की लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है और मिट्टी की उर्वरता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

गोबर खाद पर जोर

आमतौर पर धान की खेती में यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन नवागांव खुर्द के किसान उपलब्ध गोबर खाद को खेती में उपयोग कर रहे हैं।

किसानों के मुताबिक जैविक खेती का उद्देश्य सिर्फ रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करना नहीं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखते हुए लंबे समय तक खेती को टिकाऊ बनाना भी है।

जैविक खेती के फायदे, किसानों के मुताबिक

  • रासायनिक खाद पर कम निर्भरता

  • गोबर खाद का इस्तेमाल

  • खेती की लागत कम रखने में मदद

  • बेहतर उत्पादन का दावा

  • मिट्टी की उर्वरता पर जोर

सिंचाई के लिए कई संसाधनों का सहारा

खेती के लिए गांव में बोरवेल के साथ-साथ प्राकृतिक जलस्रोत और गंगरेल बांध से जुड़ी नहर का भी सहारा लिया जाता है। सिंचाई के इन संसाधनों से किसानों को फसलों के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।धान की उपज का एक हिस्सा किसान समर्थन मूल्य पर बेचते हैं, जबकि बची हुई उपज को स्थानीय मंडियों में बेचने की बात किसानों ने कही है।

जैविक खेती को बाजार और वैज्ञानिक मार्गदर्शन की जरूरत

नवागांव खुर्द के किसानों की कोशिश यह दिखाती है कि जैविक खाद के इस्तेमाल के साथ खेती में बेहतर उत्पादन हासिल करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। हालांकि उत्पादन और खेती की लागत का वास्तविक आकलन फसल, मौसम, मिट्टी और कृषि पद्धति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

किसानों का कहना है कि अगर उन्हें खेती के लिए बेहतर वैज्ञानिक मार्गदर्शन, जैविक खाद की उपलब्धता और उचित बाजार व्यवस्था मिले, तो जैविक खेती को और बड़े स्तर पर अपनाया जा सकता है।

धमतरी का नवागांव खुर्द फिलहाल इसी प्रयास के जरिए अपनी अलग पहचान बना रहा है—जहां किसान गोबर खाद के सहारे खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की कोशिश कर रहे हैं और बेहतर उत्पादन का दावा कर रहे हैं।

नीलम अहिरवार
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नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

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