भोईवाड़ा क्षेत्र में सजी आस्था और परंपरा की झलक : उदयपुर में अच्छी बारिश की कामना के लिए निभाई गई अनूठी परंपरा

उदयपुर। मेवाड़ की सांस्कृतिक परंपराएं आज भी लोगों की आस्था और लोकविश्वास को जीवंत बनाए हुए हैं। शुक्रवार को उदयपुर के भोईवाड़ा क्षेत्र में अच्छी बारिश, खुशहाली और समृद्धि की कामना को लेकर महिलाओं ने सदियों पुरानी लोक परंपरा का श्रद्धापूर्वक निर्वहन किया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ शुरू हुआ यह आयोजन पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना रहा।
गणगौर घाट से शुरू हुई धार्मिक शोभायात्रा
आयोजन की शुरुआत गणगौर घाट पर विशेष पूजा-अर्चना से हुई। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा कर जल से मटकियां भरीं। इसके बाद पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं मंगल गीत गाते हुए शोभायात्रा के रूप में जगदीश चौक की ओर रवाना हुईं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु और स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
जगदीश चौक पर निभाई गई सदियों पुरानी रस्म
शोभायात्रा के जगदीश चौक पहुंचने के बाद वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार जल से भरी मटकियों को चौक और आसपास की दुकानों के सामने फोड़ा गया। स्थानीय मान्यता है कि इस रस्म के माध्यम से वर्षा के देवता का आह्वान किया जाता है, जिससे क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है और जनजीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
लोक आस्था से जुड़ी है परंपरा
मेवाड़ में यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक भी मानी जाती है। बुजुर्गों के अनुसार, वर्षों से यह आयोजन मानसून के दौरान वर्षा की कामना के उद्देश्य से किया जाता रहा है। नई पीढ़ी भी इस परंपरा में बढ़-चढ़कर भाग ले रही है, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत जीवंत बनी हुई है।
पर्यटकों के लिए भी बना आकर्षण
आस्था और संस्कृति के इस अनोखे संगम को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी उत्साहित नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और धार्मिक अनुष्ठानों से सजा यह आयोजन मेवाड़ की समृद्ध लोक संस्कृति की एक अलग पहचान प्रस्तुत करता है। हर वर्ष आयोजित होने वाली यह परंपरा लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश देती है।
पलक गीते
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